छिंदवाड़ा, 19 सितंबर।
छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (सिम्स) के जनरल सर्जरी विभाग ने पहली बार पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट का लैप्रोस्कोपिक यानी दूरबीन तकनीक से सफल ऑपरेशन किया है। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. महेंद्र सिंह के नेतृत्व में सर्जरी टीम ने 22 वर्षीय युवती का ऑपरेशन किया। मरीज का पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया।
जानकारी के अनुसार युवती करीब 15 से 20 दिनों से पेट दर्द और उल्टी की समस्या से परेशान थी। लगातार तबीयत बिगड़ने पर परिजन पहले दमुआ में उसका उपचार करा चुके थे, लेकिन बीमारी का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। इसके बाद उसे सिम्स छिंदवाड़ा लाया गया।
अस्पताल में चिकित्सकों ने मरीज की आवश्यक जांच कराई। अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी और सीटी स्कैन की रिपोर्ट के आधार पर अग्नाशय में पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट की पुष्टि हुई। मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद जनरल सर्जरी विभाग ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
डॉ. महेंद्र सिंह के नेतृत्व में शनिवार को आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक की सहायता से सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई। चिकित्सकों के अनुसार छिंदवाड़ा जिले में इस प्रकार पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट का दूरबीन तकनीक से ऑपरेशन किया जाना सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
ऑपरेशन के बाद युवती के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हुआ। उसे पेट दर्द से राहत मिली और वह सामान्य रूप से भोजन कर पा रही है। चिकित्सकों की निगरानी में उसकी रिकवरी संतोषजनक रही।
सिम्स छिंदवाड़ा में जटिल सर्जरी को लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक करने को संस्थान की चिकित्सा सुविधाओं और सर्जरी विभाग की कार्यक्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरा उपचार होने से मरीज के परिवार पर इलाज का अतिरिक्त आर्थिक भार भी नहीं पड़ा।
















