भोपाल, 22 सितंबर।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शहडोल में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान के खुले में रखे होने और सीहोर में वेयरहाउस सब्सिडी से जुड़ी रिश्वत की शिकायत को लेकर राज्य सरकार से सवाल किए हैं। उन्होंने दोनों मामलों को प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित बताते हुए धान के सुरक्षित भंडारण और समय पर उठाव के साथ कृषि योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
पटवारी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि शहडोल में वर्ष 2025-26 के दौरान समर्थन मूल्य पर खरीदी गई करीब 9.44 लाख क्विंटल धान खुले में रखी होने के कारण बारिश से प्रभावित हुई है। उन्होंने इसकी कीमत 222 करोड़ रुपये से अधिक बताई और सवाल किया कि इतनी बड़ी मात्रा में खरीदे गए अनाज के समय पर उठाव, सुरक्षित भंडारण और मिलिंग की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी।
उन्होंने कहा कि किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई उपज को सुरक्षित रखना संबंधित सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी है। यदि बारिश के कारण धान खराब हुई है या उसमें अंकुरण हुआ है तो उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए। पटवारी ने नुकसान की स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
सीहोर में सब्सिडी को लेकर शिकायत
सीहोर में वेयरहाउस सब्सिडी से संबंधित शिकायत के मामले में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 21 सितंबर को विपणन अधिकारी अनुराग को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, शिकायत में सब्सिडी राशि जारी करने के बदले दो वेयरहाउस से रकम मांगने का आरोप लगाया गया था। भैरुंदा तहसील के शिवाय वेयरहाउस से एक लाख रुपये और रेहटी क्षेत्र के बेहराखेड़ी स्थित श्रीकृष्णा वेयरहाउस से 60 हजार रुपये मांगने की शिकायत की गई थी। शिकायत मिलने के बाद अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई।
पटवारी ने कहा कि इन आरोपों की अंतिम स्थिति जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी। उन्होंने कृषि और वेयरहाउस से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता बताई। साथ ही सवाल किया कि सब्सिडी और सरकारी सहायता हासिल करने वाले लोगों को अनावश्यक कार्यालयीन प्रक्रिया या शिकायतों का सामना न करना पड़े, इसके लिए क्या व्यवस्था की गई है।
सरकार से धान और सब्सिडी व्यवस्था पर जवाब मांगा
पटवारी ने शहडोल में खुले में रखी धान के कारणों और समय पर उठाव तथा मिलिंग की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने समर्थन मूल्य पर खरीदे गए अनाज के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारणों और बारिश से प्रभावित उपज से होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान के आकलन की जानकारी मांगी।
सीहोर मामले में उन्होंने सब्सिडी प्रक्रिया की पारदर्शिता, शिकायतों की निगरानी और लाभार्थियों के लिए सरल व्यवस्था को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। पटवारी ने कहा कि किसानों से जुड़ी योजनाओं में खरीद या सब्सिडी स्वीकृति के साथ खेत से मंडी, परिवहन और भंडारण तक की व्यवस्था समयबद्ध और पारदर्शी रहना जरूरी है।
















