नई दिल्ली, 14 मई।
देश में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल 2026 में बढ़कर 8.3 प्रतिशत (अनंतिम) दर्ज की गई है, जो अप्रैल 2025 की तुलना में है। इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, आधारभूत धातु, अन्य विनिर्माण तथा गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को कारण बताया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में सभी वस्तुओं का सूचकांक 167.0 रहा, जबकि मार्च 2026 में यह 160.8 और फरवरी में 158.4 था। इस अवधि में मासिक आधार पर थोक मूल्य सूचकांक में 3.86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
प्राथमिक वस्तुओं के समूह का सूचकांक अप्रैल में बढ़कर 202.4 पर पहुंच गया, जिसमें कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, खाद्य वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में तेजी देखी गई। हालांकि गैर-खाद्य वस्तुओं के दामों में थोड़ी गिरावट भी दर्ज की गई।
ईंधन एवं ऊर्जा क्षेत्र में सबसे अधिक तेजी देखी गई, जहां सूचकांक मार्च के 153.7 से बढ़कर अप्रैल में 181.7 हो गया। इस वृद्धि का प्रमुख कारण खनिज तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल रहा, जबकि बिजली दरों में मामूली गिरावट दर्ज हुई।
विनिर्मित उत्पादों के समूह में भी वृद्धि दर्ज की गई और सूचकांक 151.6 तक पहुंच गया। इस श्रेणी में 22 में से 21 उप-समूहों में कीमतें बढ़ीं, जिनमें धातु, रसायन, कपड़ा, खाद्य उत्पाद तथा मशीनरी एवं उपकरण प्रमुख रहे। केवल अन्य विनिर्माण समूह में गिरावट देखी गई।
खाद्य सूचकांक अप्रैल में बढ़कर 195.1 हो गया, जबकि मार्च में यह 192.8 था। इस आधार पर खाद्य मुद्रास्फीति भी 1.85 प्रतिशत से बढ़कर 2.31 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच मासिक आधार पर सूचकांक में लगातार उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है, जिसमें फरवरी, मार्च और अप्रैल में क्रमशः वृद्धि देखने को मिली है।
अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस में सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं कई कृषि एवं उपभोक्ता वस्तुओं में मिश्रित रुझान देखने को मिला है।
विनिर्माण क्षेत्र के अंतर्गत रसायन, धातु, वस्त्र और औद्योगिक उत्पादों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कुछ उप-समूहों में मामूली गिरावट भी रही।
आंकड़ों के अनुसार पिछले छह महीनों में थोक मूल्य सूचकांक और इसके घटकों में लगातार बदलाव देखा गया है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र की भूमिका सबसे अधिक प्रभावी रही है।















