वॉशिंगटन, 06 मई।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ संकेत दिए हैं कि प्रस्ताव को स्वीकार करने पर ही हालात सामान्य हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ईरान तय शर्तों को मान लेता है, तो संघर्ष विराम संभव है और जारी टकराव समाप्त किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन शर्तों को स्वीकार करने के बाद नौसैनिक नाकेबंदी हटाकर होर्मुज स्ट्रेट सभी देशों के लिए खोल दिया जाएगा, जिसमें ईरान भी शामिल रहेगा।
ट्रंप ने अपने संदेश में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि ईरान प्रस्ताव को ठुकराता है, तो उसे पहले से अधिक तीव्र हमलों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने संकेत दिए कि असहमति की स्थिति में बमबारी और सैन्य कार्रवाई तेज हो सकती है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
यह बयान उस समय सामने आया है, जब हाल ही में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ अभियान को रोका गया है। इस अभियान का उद्देश्य होर्मुज क्षेत्र में फंसे वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित निकालना बताया गया था। होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां जहाजों की आवाजाही को लेकर लगातार तनाव बना रहता है।
इससे पहले रक्षा मंत्रालय की ओर से भी कहा गया था कि यह कदम वैश्विक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। वहीं, विदेश मंत्री ने यह संकेत दिया कि अमेरिका अब संघर्ष को आगे नहीं बढ़ाना चाहता और शांति की दिशा में प्रयास करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में चलाया गया सैन्य अभियान अपने उद्देश्यों को हासिल करने के बाद रोक दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि ‘एपिक फ्यूरी’ नाम से चलाया गया यह अभियान ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का हिस्सा था, जिसमें इजरायल के सहयोग से तेहरान के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। यह अभियान फरवरी 2026 से जारी था और इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए गए थे। अब इसे सफल बताते हुए समाप्त कर दिया गया है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।









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