हैदराबाद, 08 मई।
तेलंगाना के वारंगल जिले में 800 वर्ष पुराने काकतीय कालीन शिव मंदिर को तोड़े जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल के निर्माण कार्य के लिए इस ऐतिहासिक मंदिर को बुलडोजर से हटाए जाने के बाद विवाद गहराता जा रहा है और अब इस पर कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है।
खानपुर मंडल के अशोकनगर क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई गई है। इसके बाद केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और पुरातत्व विभाग ने भी मामला संज्ञान में लिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि काकतीय शासक गणपति देव के काल का यह प्राचीन शिव मंदिर भारी मशीनों से ध्वस्त किया गया।
आरोपों के अनुसार, निर्माण कार्य के लिए जमीन तैयार करते समय मंदिर के गर्भगृह तक की खुदाई की गई, जिससे यह आशंका जताई गई कि नीचे कथित खजाने की तलाश में ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया हो सकता है। हालांकि जिला प्रशासन ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।
प्रशासन का कहना है कि छह मई को किए गए संयुक्त निरीक्षण में क्षेत्र में घनी झाड़ियां और पेड़ पाए गए थे और केवल एक पुरानी और जर्जर संरचना के अवशेष मिले थे। अधिकारियों के अनुसार किसी भी ऐतिहासिक संरचना को जानबूझकर नहीं तोड़ा गया। साथ ही पुरातत्व विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि यह संरचना संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल नहीं थी।
वहीं, वारंगल के कलेक्टर और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्थल का दौरा कर आश्वासन दिया है कि मंदिर का पुनर्निर्माण उसी स्थान पर किया जाएगा। इसके लिए इतिहासकारों, पारंपरिक मंदिर शिल्पकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। प्रशासन ने भविष्य में इस स्थल को संरक्षित करने की प्रक्रिया अपनाने की भी बात कही है।






.jpg)

.jpg)


