ब्रुनेई दारुस्सलाम, 22 अप्रैल
एशिया-प्रशांत क्षेत्र की खाद्य एवं कृषि प्राथमिकताओं को तय करने के लिए 20 से 24 अप्रैल के बीच 46 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि ब्रुनेई दारुस्सलाम में आयोजित अड़तीसवीं क्षेत्रीय सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2026 को महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने के साथ कृषि प्रणाली में लैंगिक समानता और महिलाओं की भूमिका को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल समानता का विषय नहीं है, बल्कि खाद्य असुरक्षा, जलवायु अनुकूलन, ग्रामीण गरीबी और सतत विकास जैसी चुनौतियों से निपटने की बुनियादी शर्त है। जब तक महिलाओं को पीछे रखा जाएगा, तब तक इन समस्याओं का समाधान संभव नहीं होगा।
शोध निष्कर्षों में बताया गया है कि यदि कृषि क्षेत्र में उत्पादकता और वेतन संबंधी लैंगिक अंतर को समाप्त किया जाए तो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में एक ट्रिलियन डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है और लगभग 45 मिलियन लोग खाद्य असुरक्षा से बाहर आ सकते हैं। इससे परिवारों की स्थिति मजबूत होगी और जलवायु अनुकूलन क्षमता भी बढ़ेगी।
इसके लिए वास्तविक प्रतिबद्धता का अर्थ है भेदभाव, संस्थागत बाधाओं और नीतिगत खामियों को दूर करना, जो महिलाओं की पूर्ण भागीदारी में बाधा बनती हैं। वित्तीय संस्थानों को छोटे किसानों के लिए अनुकूल सेवाएं, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
संगठन द्वारा ऐसे उपायों को बढ़ावा दिया जा रहा है जो सामाजिक सोच, शक्ति संतुलन और संस्थागत ढांचे में बदलाव लाकर असमानताओं की जड़ को समाप्त कर सकें, जिसके लिए सभी हितधारकों की भागीदारी आवश्यक बताई गई है।
कंबोडिया, नेपाल, पाकिस्तान, पापुआ न्यू गिनी और श्रीलंका जैसे देशों में ऐसे कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं, जो भेदभावपूर्ण परंपराओं को चुनौती दे रहे हैं और पुरुषों को भी परिवर्तन में सहभागी बना रहे हैं। महिला नेतृत्व वाले समूह और सहकारी समितियां कृषि मूल्य श्रृंखलाओं में बदलाव लाकर समावेशी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। वर्ष 2023 में खाद्य सुरक्षा समिति द्वारा ऐसे दिशानिर्देश अपनाए गए हैं, जिनसे सरकारें महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नीतियां और निवेश कर सकें।
इन प्रयासों को अलग-अलग पहल नहीं माना जा रहा, बल्कि इन्हें एक व्यापक बदलाव का हिस्सा बताया जा रहा है, जिन्हें जोड़कर और विस्तार देकर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
आगामी क्षेत्रीय सम्मेलन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि और छोटे किसानों, महिलाओं, युवाओं तथा कमजोर वर्गों के लिए समावेशी नीतियों को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।
वर्ष 2026 को महिला किसान वर्ष के रूप में घोषित किए जाने से इस दिशा में ठोस परिवर्तन लाने का अवसर मिला है, जिसमें सरकारों, साझेदारों और निजी क्षेत्र को मिलकर लैंगिक अंतर को समाप्त करने, आजीविका मजबूत करने और महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
इस पूरे प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर सहयोग और संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं, और संगठन सदस्य देशों के साथ मिलकर इन संकल्पों को वास्तविक कार्य में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।








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