काठमांडू, 08 मई।
नेपाल में संवैधानिक परिषद द्वारा चौथे वरीयता क्रम के डॉ. मनोज कुमार शर्मा को प्रधान न्यायाधीश पद के लिए सिफारिश किए जाने के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई है। इस निर्णय को लेकर न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी और अधिवक्ता प्रेमराज सिलवाल ने शुक्रवार को अलग-अलग रिट दायर करते हुए इस सिफारिश को चुनौती दी। उनका कहना है कि यह निर्णय शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत के विपरीत है और इससे न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है। इसी प्रकार अधिवक्ता युवराज ढकाल ने भी अलग रिट दाखिल कर इसे विधि और प्रक्रिया के विरुद्ध बताया है।
दायर याचिकाओं में राष्ट्रपति कार्यालय, संवैधानिक परिषद के अध्यक्ष बालेन्द्र शाह, स्वयं संवैधानिक परिषद, संसदीय सुनवाई समिति तथा प्रधान न्यायाधीश पद के लिए सिफारिश किए गए डॉ. शर्मा को प्रतिवादी बनाया गया है।
उल्लेखनीय है कि संवैधानिक परिषद ने गुरुवार को डॉ. शर्मा के नाम पर सहमति जताई थी, जबकि वरीयता क्रम में कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल पहले स्थान पर थीं। इसके अलावा कुमार रेग्मी और हरि प्रसाद फुयाल को भी पीछे छोड़ते हुए चौथे क्रम के शर्मा का नाम आगे बढ़ाया गया।
बैठक में इस निर्णय पर दो सदस्यों ने असहमति भी दर्ज कराई थी। राष्ट्रीय सभा अध्यक्ष नारायणप्रसाद दाहाल और प्रमुख प्रतिपक्षी दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे ने इसका विरोध किया था। इसके बावजूद संवैधानिक परिषद द्वारा सिफारिश को आगे बढ़ाए जाने पर विवाद और तेज हो गया है।






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