न्यायपालिका
08 May, 2026

11 साल पुराने हिट एंड रन मामले में अदालत का बड़ा फैसला, साजिद खान बरी

जोधपुर में 11 वर्ष पुराने हिट एंड रन गैर इरादतन हत्या मामले में अदालत ने साक्ष्यों की कमी और जांच में खामियों को देखते हुए आरोपी साजिद खान को बरी कर दिया है ।

जोधपुर 08 मई।

जोधपुर महानगर अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट न्यायालय में 11 वर्ष पुराने एक प्रकरण में शुक्रवार को निर्णय सुनाया गया। पीठासीन अधिकारी मनेन्द्र शर्मा ने सुनवाई करते हुए हिट एंड रन से जुड़े गैर इरादतन हत्या के आरोप में अभियुक्त साजिद खान को आरोपों से बरी कर दिया।

अभियुक्त की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता जहीर अब्बास ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष उसके विरुद्ध आरोप सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा। वर्ष 2015 में परिवादी देवीलाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नेशनल हैंडलूम के सामने वह अपने पिता नारायण राम के साथ जा रहे थे, तभी तेज और लापरवाही से मोटरसाइकिल चलाते हुए साजिद खान ने टक्कर मार दी, जिससे उनके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

मामले की जांच के बाद अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत गवाहों पर अधिवक्ता जहीर अब्बास ने जिरह करते हुए यह स्थापित किया कि जांच अधिकारी ने मृतक के गांव से बाद में बुलाकर कुछ रिश्तेदारों को झूठा गवाह बनाया, जो घटना के समय उपस्थित नहीं थे। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच निष्पक्ष नहीं रही।

अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि गुजराती भाषा में उपलब्ध शव परीक्षण और चिकित्सकीय दस्तावेजों का हिंदी अनुवाद नहीं कराया गया। जांच अधिकारी ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्हें गुजराती और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं है तथा उन्होंने न तो संबंधित चिकित्सक से संपर्क किया और न ही अहमदाबाद जाकर दस्तावेज प्राप्त किए। इसके बावजूद डाक के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कर दिया गया।

यह भी सामने आया कि जांच अधिकारी ने घटनास्थल का नक्शा तैयार करते समय मृतक की मौजूदगी का उल्लेख किया, जबकि उस समय मृतक अस्पताल में भर्ती था। इससे जांच प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठे।

मृतक के पुत्र ने बयान दिया कि उनके पिता को पहले तीन दिन जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में रखा गया और बाद में अहमदाबाद ले जाया गया। हालांकि जांच अधिकारी न तो मथुरादास माथुर अस्पताल से दस्तावेज प्रस्तुत कर सके और न ही चिकित्सकीय अभिलेख न्यायालय में सिद्ध कर पाए।

अदालत में यह तर्क भी रखा गया कि जब चिकित्सकीय दस्तावेज ही प्रमाणित नहीं हैं तो मृत्यु के कारण और घटना से उसके संबंध को स्थापित नहीं किया जा सकता। इसके अलावा अभियोजन पक्ष का कोई भी गवाह जिरह के दौरान आरोपों को साबित नहीं कर सका।

सभी तथ्यों और तर्कों पर विचार करते हुए न्यायालय ने अधिवक्ता जहीर अब्बास की दलीलों से सहमति जताई और अभियुक्त साजिद खान को गैर इरादतन हत्या के आरोप से बरी करने का आदेश दिया।

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