भोपाल, 08 मई।
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया के खतरों से जागरूक करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा से जुड़ा विशेष अध्याय शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस विषय की परीक्षा भी अनिवार्य रखी जाएगी।
विभाग फिलहाल इस नए पाठ्यक्रम का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। शुरुआती चरण में प्रदेश के 500 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसकी पढ़ाई शुरू की जाएगी। इसके बाद परिणामों के आधार पर इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना बनाई गई है।
अधिकारियों के अनुसार विद्यार्थियों को पासवर्ड सुरक्षा, फिशिंग हमलों से बचाव, प्राइवेसी सेटिंग्स और साइबर कानूनों की जानकारी दी जाएगी। तेजी से बढ़ती डिजिटल गतिविधियों के बीच यह पहल बच्चों को सुरक्षित डिजिटल नागरिक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
विभाग का कहना है कि पाठ्यक्रम को विद्यार्थियों की उम्र के अनुसार तैयार किया जाएगा। इसमें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, केस स्टडी और वर्कशॉप को भी शामिल किया जाएगा ताकि छात्र साइबर खतरों को व्यवहारिक तरीके से समझ सकें।
बढ़ते साइबर अपराधों पर फोकस
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ऑनलाइन गेमिंग की लत, साइबर बुलिंग, फर्जी लिंक और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग जैसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रदेश में भी स्कूली बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों के कई प्रकरण सामने आए हैं, जिसके बाद यह पहल शुरू की गई है।
नए पाठ्यक्रम के जरिए छात्रों को फेक न्यूज की पहचान, सुरक्षित ब्राउजिंग, सोशल मीडिया व्यवहार और साइबर अपराध की शिकायत प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में डिजिटल जागरूकता बढ़ेगी और भविष्य में साइबर सुरक्षा क्षेत्र में करियर के नए अवसर भी खुलेंगे।






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