नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2026।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है और अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेज दिया गया है, जिससे यह मामला न्यायिक व्यवस्था में चर्चा का विषय बना हुआ है।
न्यायाधीश यशवंत वर्मा के विरुद्ध महाभियोग की कार्रवाई पहले से ही प्रारंभ हो चुकी है, जिसके तहत लोकसभा अध्यक्ष ने जजेज इन्क्वायरी एक्ट के अंतर्गत जांच समिति का गठन कर दिया है।
लोकसभा अध्यक्ष के इस आदेश को जस्टिस वर्मा ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ गई।
उच्चतम न्यायालय ने 22 मार्च 2025 को इस प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश दिया था, जिसमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश अनु शिवरामन शामिल किए गए थे।
यह पूरा मामला उस समय से जुड़ा है जब जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली उच्च न्यायालय में कार्यरत थे और 14 मार्च 2025 को उनके आवास पर आग लगने के बाद अग्निशमन विभाग द्वारा वहां से नकदी बरामद की गई थी, जिसके बाद यह विवाद लगातार गहराता चला गया।





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