केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सरहिंद फतेह दिवस के अवसर पर बाबा बंदा सिंह बहादुर को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर अटूट आस्था, मातृभूमि के प्रति समर्पण और अन्याय के खिलाफ अदम्य साहस के प्रतीक रहे हैं।
अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने किसानों को संगठित कर अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व किया था। उन्होंने मुगल शासन को पराजित कर आत्मसम्मान, साहस और धर्म की रक्षा का अमर संदेश दिया। गृह मंत्री ने उन्हें तपस्वी स्वभाव वाला और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित योद्धा बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि कठिन से कठिन यातनाएं सहने के बावजूद बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अपने धर्म से समझौता नहीं किया। उनका जीवन सदैव राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए प्रेरणा देता रहेगा।
गौरतलब है कि बाबा बंदा सिंह बहादुर का जन्म 27 अक्टूबर 1670 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी (पुंछ) क्षेत्र में हुआ था। उनका प्रारंभिक नाम लक्ष्मण देव था और बाद में संन्यास लेने के बाद वे माधो दास बैरागी कहलाए।
वर्ष 1708 में नांदेड़ में गुरु गोबिंद सिंह से भेंट के बाद उन्हें बंदा सिंह बहादुर नाम दिया गया और खालसा सेना का नेतृत्व सौंपा गया। उन्होंने 1709 में समाना पर विजय प्राप्त की और 1710 में सरहिंद की लड़ाई में मुगल सूबेदार वजीर खान को पराजित किया।
इसके बाद उन्होंने पंजाब में किसानों को भूमि का अधिकार देकर जमींदारी प्रथा को समाप्त किया और प्रथम सिख राज्य की स्थापना की। 1715 में उन्हें मुगलों द्वारा बंदी बनाया गया और 9 जून 1716 को दिल्ली में यातनाएं देकर शहीद कर दिया गया।
सरहिंद फतेह दिवस हर वर्ष मई महीने में 12 से 14 मई के बीच मनाया जाता है, जो 1710 की उस ऐतिहासिक विजय की याद दिलाता है जब बाबा बंदा सिंह बहादुर ने सरहिंद पर जीत दर्ज कर सिख इतिहास में महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा था।







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