मैसूर, 06 मई।
कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच सिद्धारमैया ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि राज्य के नेतृत्व को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का आलाकमान ही करेगा और वे उसी के निर्देशों का पालन करेंगे। बार-बार पूछे जा रहे सवालों पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर वही निर्णय मान्य होगा, जो शीर्ष नेतृत्व तय करेगा।
कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ समय से नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। विशेष रूप से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थकों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। पार्टी का एक वर्ग वर्ष 2023 के कथित सत्ता-साझेदारी समझौते का हवाला देते हुए बदलाव की मांग कर रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि यदि आलाकमान उन्हें पूरा कार्यकाल सौंपता है, तो वे पद पर बने रहेंगे।
हाल ही में हुए उपचुनावों में मिली जीत पर उन्होंने संतोष जताया और इसे जनता के भरोसे का प्रतीक बताया। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं और गारंटियों को जनता का समर्थन मिला है, जिससे स्पष्ट होता है कि लोग मौजूदा प्रशासन से संतुष्ट हैं। विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उनके विरोधी ठोस मुद्दों के बजाय साजिशों का सहारा ले रहे हैं। श्रृंगेरी उपचुनाव में पुनर्मतगणना को उन्होंने आपराधिक षड्यंत्र करार दिया और दावा किया कि कई वैध मतों को गलत तरीके से निरस्त किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर पार्टी अदालत का रुख करेगी।









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