भोपाल, 14 मई।
आजीविका मिशन की कृषि सखियों द्वारा परंपरागत बीजों के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत उन्हें बीज सखी के रूप में प्रशिक्षित कर स्थापित किया गया है। प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण के बाद कुल 454 बीज सखियों का गठन किया गया है, जो देशी बीजों के संरक्षण और प्रसार का कार्य कर रही हैं।
वर्तमान में प्रदेश के 29 जिलों में 99 बीज बैंक स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें सर्वाधिक 20 बीज बैंक सागर जिले और 10 बीज बैंक बालाघाट जिले में संचालित हैं। देशी बीजों की विशेषता यह है कि वे स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप होते हैं, कम जल, उर्वरक और कीटनाशक में भी बेहतर उत्पादन देते हैं तथा पोषण से भरपूर और सूखा-रोग प्रतिरोधी होते हैं।
इन बीजों को पुनः उपयोग में लाया जा सकता है, जिससे किसान आत्मनिर्भर बनते हैं और खेती अधिक किफायती तथा टिकाऊ होती है। इस प्रकार बीज सखियों की भूमिका ग्रामीण कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
बीज सखियों को प्रशिक्षण पद्मश्री सम्मानित श्री बाबूलाल दहिया सहित उद्यानिकी और कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा दिया जा रहा है। इसके अलावा डिंडोरी की फुलझरिया बाई और कर्नाटक की बी.बी. जान जैसी अनुभवी बीज संरक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा कर प्रशिक्षण प्रदान किया है।
बालाघाट की बीज सखी सुनीता सिहोरे द्वारा लगभग 70 प्रकार के देशी बीजों का संरक्षण किया जा रहा है, जिनमें सब्जी, अनाज और दलहन शामिल हैं। वे किसानों को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराती हैं और फसल उत्पादन के बाद लिए गए बीज का दोगुना बीज वापस बीज बैंक में जमा करने की व्यवस्था से आगे अन्य किसानों को भी लाभ मिल रहा है।
आगामी खरीफ मौसम के लिए किसान अपने विकासखंड के ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से बीज सखियों की सूची प्राप्त कर देशी बीजों के उपयोग हेतु उनसे संपर्क कर सकते हैं।








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