असम
14 May, 2026

गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना से पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी को नई रफ्तार

गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना से पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलने के साथ 5700 करोड़ की यह योजना क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

गुवाहाटी, 14 मई।

केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट-एक्ट फर्स्ट नीति के तहत पूर्वोत्तर राज्यों के तेज विकास के बीच गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव लाने वाला माना जा रहा है। इस परियोजना से न केवल पूर्वोत्तर भारत के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, बल्कि गुवाहाटी के माध्यम से आसियान देशों के साथ व्यापारिक संपर्क भी मजबूत होंगे।

पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार माने जाने वाले गुवाहाटी शहर के विस्तार और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने में यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी। लगभग 5700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली यह योजना शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर यातायात को अधिक सुचारु बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर टोल मॉडल के तहत यह परियोजना दिनेशचंद्र आर अग्रवाल इंफोकोन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है। इसकी कुल लंबाई लगभग 121 किलोमीटर तय की गई है, जिसमें बाइहाटा चारियाली से सोनापुर तक 55.54 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड नॉर्दर्न बाइपास का निर्माण प्रमुख हिस्सा है।

परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में ब्रह्मपुत्र नदी पर कुरुआ से नारेंगी के बीच प्रस्तावित छह लेन का पुल शामिल है। करीब तीन किलोमीटर लंबे इस पुल से मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही तेज होने की संभावना है, जिससे शहर के भीतर यातायात दबाव में कमी आएगी।

बाइपास और पुल निर्माण के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के कुछ हिस्सों के चौड़ीकरण की भी योजना है। अधिकारियों का मानना है कि इससे सिलचर, शिलांग और अपर असम जैसे क्षेत्रों तक संपर्क बेहतर होगा और व्यापार, लॉजिस्टिक्स तथा आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

पर्यावरणीय मंजूरी के साथ वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, हालांकि हाथी गलियारों की सुरक्षा के लिए कई शर्तें लागू की गई हैं। वन्यजीवों की आवाजाही बाधित न हो, इसके लिए बशिष्ठ और जोराबाट के बीच एलिवेटेड रोड सेक्शन प्रस्तावित किया गया है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 के मानसून के बाद निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसे चरणबद्ध तरीके से 2027 से 2030 के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना 30 वर्ष की कंसेशन अवधि पर आधारित है, जिसमें चार वर्ष निर्माण कार्य के लिए निर्धारित हैं।

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