काठमांडू, 08 जुलाई।
नेपाल के भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को उद्घाटन के चार साल बाद भी नियमित विदेशी उड़ानों का इंतजार है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह हवाई अड्डा पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय उड़ानें नहीं मिलने के कारण अधिकतर समय खाली नजर आता है।
हवाई अड्डे का अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल आधुनिक इमिग्रेशन व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली और सक्षम रनवे जैसी सुविधाओं से पूरी तरह तैयार है। इसके बावजूद नियमित विदेशी उड़ानों के अभाव में यहां कभी-कभार चार्टर उड़ानें ही संचालित होती हैं और यात्रियों की आवाजाही के बाद फिर सन्नाटा छा जाता है।
हवाई अड्डा प्रबंधन और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि समस्या सुविधाओं की नहीं, बल्कि कमजोर बाजार रणनीति, नीतिगत कमियों और सरकारी एजेंसियों, एयरलाइंस तथा ट्रैवल ऑपरेटरों के बीच बेहतर समन्वय की कमी की है।
गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के कार्यवाहक महाप्रबंधक श्याम किशोर शाह के अनुसार, थाई एयर एशिया बैंकॉक-भैरहवा-बैंकॉक मार्ग पर सप्ताह में दो नियमित उड़ानें संचालित करती थी, लेकिन मार्च में शीतकालीन शेड्यूल समाप्त होने के बाद यह सेवा बंद हो गई। ग्रीष्मकालीन शेड्यूल शुरू होने के बाद अक्टूबर तक कोई नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान प्रस्तावित नहीं है। हालांकि, बीच-बीच में चार्टर उड़ानें आती रहती हैं।
शाह ने बताया कि एयरलाइंस ने नियमित उड़ानें बंद करने का मुख्य कारण यात्रियों की पर्याप्त संख्या नहीं होना बताया है। उन्होंने कहा कि विमान आने के बावजूद अपेक्षित यात्री नहीं मिलते। उड़ान के समय कुछ यात्री होते हैं, लेकिन वापसी की उड़ानें लगभग खाली रहती हैं, जिससे व्यावसायिक संचालन मुश्किल हो जाता है।
उनका कहना है कि समस्या यात्रियों की कमी नहीं, बल्कि उनके बेहतर प्रबंधन की है। पहले मधेश, कोशी और सुदूरपश्चिम सहित कई क्षेत्रों के यात्री भैरहवा से यात्रा करते थे, लेकिन यात्रियों को एयरलाइंस से जोड़ने की प्रभावी व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी।
अधिकारियों के अनुसार, विदेश रोजगार के लिए श्रमिक भेजने वाली मैनपावर एजेंसियों, टिकट एजेंसियों और जनरल सेल्स एजेंटों को मिलकर काम करना होगा। कई विदेशी एयरलाइंस अब भी काठमांडू स्थित जीएसए पर निर्भर हैं, जिनका नेटवर्क राजधानी तक सीमित है।
नेपाल सरकार ने लैंडिंग शुल्क, नेविगेशन शुल्क और यात्री सेवा शुल्क में छूट देने के साथ ग्राउंड हैंडलिंग और विमान ईंधन पर भी रियायतें दी हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि केवल आर्थिक छूट से लंबे समय तक उड़ानों का संचालन संभव नहीं है, इसके लिए मजबूत बाजार योजना जरूरी है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से मई 2026 तक इस हवाई अड्डे से 1,218 अंतरराष्ट्रीय विमान संचालन हुए और 69,316 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों ने यात्रा की। वर्ष 2023 में यात्रियों की संख्या घटकर 4,751 रह गई थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 19,590 हुई, लेकिन यह संख्या अभी भी हवाई अड्डे की क्षमता से काफी कम है।
नेपाल एसोसिएशन ऑफ टूर एंड ट्रैवल एजेंट्स लुंबिनी प्रदेश के अध्यक्ष चंद्र बहादुर श्रेष्ठ ने कहा कि सरकार लंबे समय से हवाई अड्डे को पूरी तरह सक्रिय करने का दावा कर रही है, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि काठमांडू का त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहले ही दबाव में है, इसलिए दोनों अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के बीच उड़ानों के संतुलित संचालन की नीति जरूरी है।
उन्होंने भैरहवा में श्रम सहायता केंद्र, चिकित्सा केंद्र और वीजा सेवाएं शुरू करने का सुझाव दिया, ताकि पश्चिमी नेपाल के श्रमिकों को विदेश रोजगार से जुड़े कामों के लिए काठमांडू न जाना पड़े।
करीब 35 अरब नेपाली रुपये की लागत से तैयार गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन मई 2022 में हुआ था। करीब 800 बीघा क्षेत्र में फैले इस हवाई अड्डे में तीन किलोमीटर लंबा रनवे, आधुनिक नेविगेशन प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विमान संचालन क्षमता उपलब्ध है। इसके बावजूद यह अब तक लुंबिनी और पश्चिमी नेपाल के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर पाया है।
















