एक साहब ने नेक नीयत से दूसरे विभाग के कुछ अधिकारियों की अपने आला अफसरों के सामने खूब तारीफ कर दी।
अब वही तारीफ उनके लिए सिरदर्द बन गई है। जिनकी पैरवी की थी, वही अब उनकी कुर्सी के संभावित दावेदार बताए जा रहे हैं। साहब अब लोगों को मुफ्त की सलाह दे रहे हैं—"भलाई भी सोच-समझकर किया करो।"
















