बड़े नौकरशाह से मिलने की हर कोशिश नाकाम रही तो एक साहब ने सामाजिक रिश्तों का सहारा लिया। बड़े वैवाहिक समारोह में बड़े साहब भी पहुंचे।
स्वागत-सत्कार ऐसा हुआ कि बड़े साहब भी गदगद हो गए। अब देखने वाली बात यह है कि शादी की मिठास फाइलों तक पहुंचती है या वहीं पंडाल में खत्म हो जाती है।
















