बीजिंग, 07 मई।
चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तहत दो पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंगहे को दोषी करार दिया गया है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार दोनों अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई है, हालांकि सजा लागू करने से पहले उन्हें दो वर्ष तक कारावास में रखा जाएगा। इस अवधि में यदि कोई नया अपराध सामने नहीं आता है तो सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है।
दोनों पूर्व मंत्रियों पर रक्षा मंत्रालय और सेना से जुड़े मामलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार ली शांगफू पर अनुशासनहीनता, रिश्वत लेने और अन्य को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप सिद्ध हुए हैं। वहीं वेई फेंगहे पर सैन्य खरीद और रक्षा निर्णयों में अनियमितताओं के बदले रिश्वत लेने का आरोप प्रमाणित हुआ है।
ली शांगफू को पिछले वर्ष अचानक पद से हटा दिया गया था और इसके बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से अनुपस्थित रहे, जिससे कई तरह की अटकलें लगाई जाती रहीं। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि उनके खिलाफ जांच चल रही थी। वहीं वेई फेंगहे चीन की सेना में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं और उन्होंने रॉकेट फोर्स जैसी रणनीतिक इकाई का भी नेतृत्व किया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों अधिकारियों की गतिविधियों से सैन्य उपकरण विकास और रक्षा खरीद प्रणाली पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। कई सैन्य ठेकों और सौदों में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है।
यह कार्रवाई चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में चीन की सेना और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों पर इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जा चुकी है।
चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन की जांच में यह भी पाया गया कि हथियार खरीद विभाग और रॉकेट फोर्स में व्यापक अनियमितताएं हुई थीं। रॉकेट फोर्स चीन की परमाणु और मिसाइल क्षमता की देखरेख करती है और इसे देश की सैन्य ताकत का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सेना में अनुशासन और नियंत्रण को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है, साथ ही यह संदेश भी दिया गया है कि उच्च पदों पर बैठे किसी भी अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामलों में बख्शा नहीं जाएगा।




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