नागपुर, 27 अप्रैल
छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए गए बयान के बाद उठे विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री ने खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी है। यह मामला रविवार को नागपुर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान स्पष्ट किया गया, जहां उन्होंने अपने कथन पर स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया, जिससे अनावश्यक विवाद उत्पन्न हुआ। उन्होंने दोहराया कि वे स्वराज और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा में छत्रपति शिवाजी महाराज को सर्वोच्च स्थान देते हैं और उनके प्रति किसी प्रकार की नकारात्मक टिप्पणी की कल्पना भी नहीं कर सकते।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनका आशय भक्ति और गुरु-शिष्य परंपरा के संदर्भ को समझाने का था, जिसमें शिवाजी महाराज की अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के प्रति निष्ठा को दर्शाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके उदाहरण का भाव महाभारत में अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवाद जैसा था।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल शिवाजी महाराज की महानता और उनके आध्यात्मिक समर्पण को उजागर करना था, लेकिन बयान के एक हिस्से को संदर्भ से अलग कर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।
पूर्व में दिए गए बयान को लेकर विवाद तब शुरू हुआ था जब एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थककर अपनी जिम्मेदारियों से विरत होना चाहते थे और इस दौरान उन्होंने अपना मुकुट गुरु समर्थ रामदास के चरणों में अर्पित किया था। बाद में गुरु रामदास ने उन्हें समझाते हुए मुकुट वापस पहनाया और कर्तव्य निभाने का संदेश दिया था।













