नई दिल्ली, 07 मई 2026
राष्ट्रपति भवन में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के सम्मान में आयोजित राजकीय स्वागत और भोज के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वियतनामी राष्ट्रपति की भारत की प्रथम राजकीय यात्रा पर मेजबानी करते हुए कहा कि भारत और वियतनाम के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत रूप से गहरे जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और यह संबंध समय के साथ और अधिक प्रगाढ़ होते जा रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत की ‘पूर्व की ओर देखो नीति’ और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण में वियतनाम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर आयोजित राजकीय भोज में बिहार और महाराष्ट्र के पारंपरिक व्यंजनों की विशेष झलक देखने को मिली। बिहार से सिलाओ खाजा, गया अनरसा, मिथिला मखाना और हाजीपुर मालभोग केला जैसे व्यंजन परोसे गए, जो अपनी विशिष्ट पहचान और पारंपरिक स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं।
महाराष्ट्र की ओर से रत्नागिरी आम और स्वास्थ्यवर्धक मिलेट आधारित व्यंजन भोज का हिस्सा बने, जिनमें प्राकृतिक मिठास और पौष्टिकता को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया।
इस दौरान अतिथि राष्ट्रपति को विशेष स्मृति उपहार भी प्रदान किए गए, जिनमें पीतल से निर्मित बोधि वृक्ष की प्रतिमा, 108 पंखुड़ियों वाला कमल आधारित ‘नमो 108’ पुष्प तथा रेशमी वस्त्र शामिल थे। ये उपहार भारतीय कला, आध्यात्मिक परंपरा और शिल्प कौशल का प्रतीक बताए गए।
‘नमो 108’ कमल को विशेष रूप से 108 पंखुड़ियों के साथ विकसित किया गया है, जिसे पवित्रता और आध्यात्मिक संतुलन का प्रतीक माना जाता है, वहीं बोधि वृक्ष आधारित प्रतिमा ध्यान, करुणा और सुरक्षा का संदेश देती है। रेशमी वस्त्र पारंपरिक भारतीय बुनाई और सांस्कृतिक सौंदर्य को दर्शाता है।
यह पूरा आयोजन भारत और वियतनाम के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।












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