नई दिल्ली, 29 मई।
उच्चतम न्यायालय ने पॉक्सो मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से मिली अग्रिम जमानत को बरकरार रखा है। जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए जमानत पर अपनी मुहर लगा दी।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। बेंच ने उनसे पूछा, "आप पहले भी वहीं थे और सब कुछ जानते थे। जब अपराध घटित हुआ, तब आप पुलिस के पास जरूर गए, लेकिन किसी दूसरे मकसद से। आपने इस अपराध के बारे में पुलिस को समय पर सूचित क्यों नहीं किया?"
इस याचिका को शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने दायर किया था। याचिकाकर्ता के वकील सौरभ अजय गुप्ता ने अदालत में तर्क दिया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जमानत पर बाहर रहने से वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जमानत देते समय 'मिनी ट्रायल' की तरह फैसला सुनाया और मामले की गलत व्याख्या की। याचिका में यह भी दावा किया गया था कि शंकराचार्य ने मीडिया में बयान न देने की उच्च न्यायालय की शर्त का उल्लंघन किया है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद याचिकाकर्ता के तर्कों से असहमति जताई और अग्रिम जमानत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।











