चेन्नई, 30 मई ।
तमिलनाडु की राजनीति में कथित विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है, जहां प्रमुख विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने राज्यपाल से मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कथित हॉर्स ट्रेडिंग की निष्पक्ष जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब करने की मांग की।
अन्नाद्रमुक नेताओं का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल विपक्षी विधायकों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है।
पार्टी का कहना है कि विपक्षी विधायकों से लगातार संपर्क साधकर उन्हें दल बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है और इसे गंभीर राजनीतिक मुद्दा करार दिया है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं ने यह भी दावा किया कि कुछ विधायकों को कथित रूप से प्रलोभन देकर पार्टी छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया, जबकि अन्य विधायकों पर भी इसी तरह के दबाव बनाने की कोशिशें जारी हैं।
पार्टी ने अपने ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के बाद बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच सरकार गठन के दौरान विपक्षी विधायकों के समर्थन को प्रभावित करने के प्रयास सामने आए हैं, जिससे राजनीतिक संकट गहराया है।
वहीं राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि विश्वास मत के दौरान कुछ विधायकों द्वारा सरकार के पक्ष में मतदान किए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष उभर आया और कुछ विधायकों के इस्तीफे की बात भी सामने आई।
अन्नाद्रमुक ने सचिवालय के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों और दलगत हितों के लिए किया जा रहा है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद पार्टी नेताओं ने कहा कि यह शिकायत संविधान के प्रावधानों के तहत दर्ज कराई गई है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले में जांच आगे बढ़ती है तो तमिलनाडु की राजनीति में बड़े स्तर पर प्रभाव पड़ सकता है और आने वाले समय में सियासी समीकरण और बदल सकते हैं।




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