सरकार व नीतियाँ
01 Jun, 2026

एनएनआरएफ से रिसर्च फंडिंग होगी अधिक लोकतांत्रिक, 200 करोड़ का महा वॉटर मिशन लॉन्च

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि एनएनआरएफ रिसर्च फंडिंग को व्यापक बनाते हुए स्टार्टअप, एमएसएमई और विश्वविद्यालयों को समान अवसर देने की दिशा में कार्य कर रहा है।

नई दिल्ली, 01 जून ।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनएनआरएफ) देश में अनुसंधान फंडिंग व्यवस्था को अधिक समावेशी और लोकतांत्रिक बना रहा है, जिससे केवल बड़े संस्थानों तक सीमित अवसरों को अब स्टार्टअप, एमएसएमई, विश्वविद्यालयों और नए शोधकर्ताओं तक विस्तारित किया जा रहा है।

सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान उन्होंने 200 करोड़ रुपये के महा वॉटर मिशन की शुरुआत की। इस मिशन का उद्देश्य जल क्षेत्र में नई तकनीकों, नवाचारों और समाधानों को विकसित कर जल संरक्षण, जल गुणवत्ता, सिंचाई और जल प्रबंधन को सशक्त बनाना है, जिससे रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि देश में पिछले दशक में स्टार्टअप की संख्या लगभग 400 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है, जो नवाचार के क्षेत्र में तेज प्रगति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महा वॉटर मिशन के माध्यम से जल संसाधनों के सतत उपयोग और तकनीकी समाधान को बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एनएनआरएफ की एमएएचए पहल केवल जल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन तकनीक, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, 6जी संचार और जल प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों में मिशन आधारित कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिससे आत्मनिर्भर तकनीकी विकास को गति मिल रही है।

उन्होंने बताया कि महा वॉटर मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें चयनित परियोजनाओं और कंसोर्टियम को 20 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इस मिशन में स्टार्टअप, एमएसएमई, विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं और उद्योग जगत मिलकर संयुक्त रूप से कार्य कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल शोध तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि विकसित तकनीकों को वास्तविक उपयोग, फील्ड टेस्टिंग और व्यावहारिक अनुप्रयोग तक पहुंचाना है।

मिशन के तहत जल संसाधनों का सतत प्रबंधन, पेयजल उपलब्धता, जल गुणवत्ता एवं पारिस्थितिक संतुलन, जल उपयोग दक्षता और सर्कुलर इकोनॉमी तथा जलवायु परिवर्तन के अनुरूप अनुकूलन जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

इस अवसर पर इसरो और जल शक्ति मंत्रालय के बीच एक समझौता भी हुआ, जिसके तहत सैटेलाइट और जियोस्पेशियल तकनीक का उपयोग भूजल आकलन, जल संसाधन मानचित्रण, सिंचाई योजना, जल गुणवत्ता निगरानी और बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा।

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