भोपाल, 02 जून।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक परिणाम देने के लिए राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। इसके तहत शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आज (2 जून) से विधिवत रूप से शुरू हो गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को 'राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर' के रूप में तैयार करना है।
राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान और लोक शिक्षण संचालनालय के असेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह प्रशिक्षण 'समग्र शिक्षा अभियान' के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ आज ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन में हुआ।
1,872 शिक्षक बनेंगे मास्टर ट्रेनर:
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश भर के कुल 1,872 शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं। इसमें 12 विषयों को शामिल किया गया है, जिसके लिए प्रत्येक जिले से 3-3 शिक्षकों का चयन मास्टर ट्रेनर के रूप में किया गया है। ये मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने-अपने जिलों में लौटकर अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया और शिक्षण अधिगम गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
वैज्ञानिक और विद्यार्थी-केंद्रित होगी मूल्यांकन प्रणाली:
इस प्रशिक्षण का ध्येय स्कूली शिक्षा की मूल्यांकन प्रणाली को वैज्ञानिक, सटीक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। इसके माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक मूल्यांकन तकनीकें, गुणवत्तापूर्ण प्रश्नपत्र तैयार करना और परीक्षा परिणामों का सूक्ष्म विश्लेषण करना सिखाया जाएगा। प्रशिक्षण में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान (रसायन, भौतिक, जीव), सामाजिक विज्ञान (इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान) और कॉमर्स विषय शामिल हैं।
इस पहल से मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक परीक्षाओं की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ विद्यार्थियों की सीखने की क्षमताओं का बेहतर आकलन हो सकेगा। राज्य सरकार के अनुसार, यह प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को पूरा करने और स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।












