नई दिल्ली, 2 जून ।
झारखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल से जल पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मंगलवार को जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में यह समझौता संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन के अंतर्गत लंबित लगभग 6500 करोड़ रुपये की राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019-20 से राज्य में पेयजल परियोजनाओं पर 24 हजार 635 करोड़ रुपये की लागत से कार्य किए जा रहे हैं। इनमें बहु-ग्रामीण और एकल-ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन स्वीकृत केंद्रीय सहायता का केवल 46 प्रतिशत हिस्सा ही प्राप्त हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान अपेक्षित धनराशि जारी नहीं होने से परियोजनाओं की गति प्रभावित हुई है। राज्य सरकार ने चल रही योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री सोरेन ने पेयजल परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विभिन्न केंद्रीय विभागों और एजेंसियों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने केंद्र से प्रक्रिया को तेज करने का अनुरोध किया ताकि परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जा सके।
बैठक में झारखंड सरकार द्वारा गांवों में एकल-ग्रामीण जल योजनाओं के संचालन के लिए नियुक्त ‘जल सहियाओं’ की भूमिका पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें प्रतिमाह 2500 रुपये मानदेय दिया जा रहा है और इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए केंद्र के सहयोग की अपेक्षा है।
उन्होंने भविष्य की परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट में सभी आवश्यक घटकों को शामिल करने की आवश्यकता भी रेखांकित की, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने राज्य की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि जलापूर्ति योजनाओं के उन्नयन, संचालन और रखरखाव के लिए अलग से वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे खर्चों का प्रबंधन वित्त आयोग के तहत पंचायत संस्थाओं को मिलने वाले अनुदान से किया जा सकता है।
बैठक में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्यों को पूरा करने पर भी विशेष जोर दिया गया।











