नई दिल्ली, 03 जून ।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन और भारतीय मौसम विभाग ने वैश्विक जलवायु परिस्थितियों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि आने वाले तीन महीनों के दौरान भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
प्रशांत महासागर में समुद्री जल के लगातार गर्म होने के कारण अल नीनो की सक्रियता की संभावना लगभग अस्सी प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो नवंबर तक नब्बे प्रतिशत या उससे अधिक बनी रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखा और कुछ में अत्यधिक वर्षा की परिस्थितियां बन सकती हैं।
भारतीय मौसम विभाग के आकलन के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की आशंका है। हालांकि मानसून के केरल तट पर चार जून तक पहुंचने की संभावना जताई गई है, जो सामान्य आगमन समय से थोड़ा विलंबित है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हिंद महासागर द्विध्रुव और मैडेन जूलियन दोलन जैसे मौसमी तंत्र भारत में मानसून के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित कर सकते हैं। ये परिस्थितियां कमजोर मानसून के दौरान भी कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना बनाए रखती हैं।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार प्रशांत महासागर की सतह के नीचे का जल सामान्य से लगभग छह डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म पाया गया है, जो स्थिति को और गंभीर बना रहा है। यह अतिरिक्त ऊष्मा समुद्र की सतह को गर्म कर अल नीनो को और मजबूत कर सकती है।
कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों को सतर्क रहने और जिला स्तर पर तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों और कॉल सेंटर सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो की स्थिति तब बनती है जब प्रशांत महासागर में व्यापारिक हवाएं कमजोर हो जाती हैं और समुद्री जल का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिससे वैश्विक जलवायु संतुलन प्रभावित होता है।
पिछले वर्षों में भी ऐसी स्थितियों ने कई देशों में तापमान वृद्धि और गंभीर जलवायु संकट पैदा किए हैं, जिसके चलते इस बार सभी देशों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी गई है ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।











