नई दिल्ली, 12 मई।
वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय सेवा विभाग ने मंगलवार को ‘भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल’ की शुरुआत की, जिसकी कुल क्षमता 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर निर्धारित की गई है और इसमें 1.4 अरब डॉलर (लगभग 12,980 करोड़ रुपये) की संप्रभु गारंटी शामिल है, जिसका उद्देश्य वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच समुद्री बीमा कवरेज को सुरक्षित और निरंतर बनाए रखना है।
इस योजना का औपचारिक शुभारंभ विभाग के सचिव एम. नागराजू की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में किया गया, जहां उन्होंने इस पूल के अंतर्गत जारी पहली मरीन हल एवं मशीनरी वार पॉलिसी भी प्रदान की।
यह पॉलिसी द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा होगर ऑफशोर एंड मरीन प्राइवेट लिमिटेड को जारी की गई, जिससे इस नई बीमा व्यवस्था का व्यावहारिक क्रियान्वयन शुरू हो गया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार इस पूल के तहत भारतीय ध्वज वाले या भारत से जुड़े जहाजों के लिए हल, मशीनरी, कार्गो, सुरक्षा एवं क्षतिपूर्ति तथा युद्ध जोखिम जैसे विभिन्न समुद्री जोखिमों को कवर किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य विदेशी पुनर्बीमा पर निर्भरता को कम करना और समुद्री बीमा के क्षेत्र में भारत की संप्रभु क्षमता को मजबूत करना है, विशेषकर उन उच्च जोखिम या प्रतिबंध-संवेदनशील मार्गों पर जहां वैश्विक बीमाकर्ता सेवाएं वापस ले सकते हैं।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि इस व्यवस्था के संचालन के लिए एक गवर्निंग बॉडी और अंडरराइटिंग समिति का गठन किया गया है, जबकि भारतीय सामान्य बीमा निगम को इस पूल का प्रशासनिक प्रबंधक बनाया गया है।
इस संरचना के अनुसार, 100 मिलियन डॉलर तक के दावों का निपटारा पूल की संयुक्त क्षमता से किया जाएगा, जबकि इससे अधिक दावों को भंडार और पुनर्बीमा व्यवस्था समाप्त होने के बाद संप्रभु गारंटी के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यह पहल भारत के समुद्री व्यापार की सुरक्षा को मजबूत करेगी, शिपिंग संचालन की निरंतरता सुनिश्चित करेगी और वैश्विक व्यापार लॉजिस्टिक्स में वित्तीय संप्रभुता को बढ़ावा देगी।











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