अरुणाचल प्रदेश, 08 अप्रैल।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने अरुणाचल प्रदेश के कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिलों में 1720 मेगावाट क्षमता वाले कमला जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 26,069.50 करोड़ रुपये निवेश की मंजूरी दी है। इस परियोजना को पूरा करने की अनुमानित अवधि 96 महीने यानी आठ वर्ष निर्धारित की गई है।
इस जलविद्युत परियोजना में आठ इकाईयों की 210 मेगावाट और एक इकाई की 40 मेगावाट क्षमता शामिल है। इस प्रकार कुल 6870 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। इस परियोजना से अरुणाचल प्रदेश में बिजली की आपूर्ति मजबूत होगी, उच्चतम मांग के समय बिजली प्रबंधन में मदद मिलेगी, राष्ट्रीय ग्रिड का संतुलन बना रहेगा और ब्रह्मपुत्र घाटी में बाढ़ नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी।
कमला जलविद्युत परियोजना एनएचपीसी लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार के संयुक्त उद्यम के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसके अलावा एनएचपीसी लिमिटेड अरुणाचल प्रदेश में अन्य प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं जैसे सुबनसिरी लोअर और दिबांग बहुउद्देश्यीय परियोजना निर्माणाधीन हैं, जबकि एटालिन परियोजना प्रस्तावित है।
केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए:
- 4,743.98 करोड़ रुपये बाढ़ नियंत्रण के लिए प्रदान करेगी।
- 1,340 करोड़ रुपये बुनियादी ढांचा जैसे सड़क, पुल और विद्युत संचरण के लिए प्रदान करेगी।
- 750 करोड़ रुपये राज्य की इक्विटी हिस्सेदारी के लिए केंद्रीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराएगी।
राज्य सरकार को इस परियोजना से 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली मिलेगी और अतिरिक्त एक प्रतिशत राजस्व स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के लिए निर्धारित किया गया है।
इस परियोजना से कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिलों में बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास होगा। लगभग 196 किलोमीटर सड़क और पुल बनाए जाएंगे, जो स्थानीय लोगों के उपयोग के लिए भी उपलब्ध रहेंगे। साथ ही अस्पताल, विद्यालय और बाजार जैसी आवश्यक सुविधाओं के निर्माण के लिए आठ करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है।
स्थानीय लोगों को मुआवजा, रोजगार और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी गतिविधियों के माध्यम से भी लाभ मिलेगा। सुबनसिरी लोअर परियोजना का 750 मेगावाट हिस्सा पहले ही चालू हो चुका है और शेष क्षमता दिसंबर तक पूरी होने की संभावना है। इन सभी परियोजनाओं के अंतर्गत राज्यों को 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली और एक प्रतिशत राजस्व स्थानीय विकास के लिए दिया जाएगा।








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