खुद को विकास पुरुष और विजनरी कहलवाने के शौकीन साहब भले ही विभाग बदल चुके हों, लेकिन उनकी नजरें अब भी पुरानी फाइलों पर टिकी हैं। वजह साफ है...
खुद को विकास पुरुष और विजनरी कहलवाने के शौकीन साहब भले ही विभाग बदल चुके हों, लेकिन उनकी नजरें अब भी पुरानी फाइलों पर टिकी हैं। वजह साफ है—डर कहीं ऐसा न हो कि पुराने फैसलों की फाइलें खुल जाएं और विकास की परतों के नीचे दबे कारनामे बाहर आ जाएं। उधर नए साहब ने आते ही संदेश दे दिया है कि अब विभाग पुराने साये में नहीं चलेगा। नतीजा यह कि पुराने साहब के खासमखास भी धीरे-धीरे साइड लाइन हो रहे हैं।