उज्जैन, 07 अप्रैल।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय काल गणना की वैज्ञानिकता और उसकी प्राचीन श्रेष्ठता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात खगोल वैज्ञानिकों और विद्वानों ने भाग लेकर भारतीय समय-गणना पद्धति पर गहन चर्चा और विचार-विमर्श किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन नगरी ऐतिहासिक रूप से काल गणना का प्रमुख केंद्र रही है। प्राचीन काल में भूमध्य रेखा और कर्क रेखा के कटाव का केंद्र बिंदु उज्जैन को माना जाता था, जो वर्तमान में उज्जैन से लगभग 32 किलोमीटर दूर डोंगला क्षेत्र में स्थित है। इस वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को पुनः पहचान दिलाना इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य रहा।
उन्होंने कहा कि उज्जैन की यह गौरवशाली पहचान केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। सम्मेलन के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और खगोल विज्ञान में उसकी अग्रणी भूमिका को पुनः विश्व पटल पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह के आयोजनों से उज्जैन की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध वैज्ञानिक विरासत को समझने और अपनाने की प्रेरणा मिलेगी।








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