मैहर, 14 मई।
जिले में आजीविका मिशन से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत ‘मैहर डॉल्स’ ब्रांड के माध्यम से महिलाओं को जोड़कर उन्हें गुड़िया निर्माण की गतिविधियों से रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
इस नवाचार के अंतर्गत चयनित स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण, कच्चा माल, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधा जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस पहल की शुरुआत कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी द्वारा महिला समूहों के सशक्तीकरण के उद्देश्य से की गई है।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक के दौरान ‘मैहर डॉल्स’ योजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया गया, जिसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, एसडीएम, नगर पालिका अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जनपद पंचायतों के अधिकारी तथा आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में कलेक्टर ने महिला स्व-सहायता समूहों से सीधे संवाद कर उनकी गतिविधियों और कार्यों की जानकारी ली और कहा कि ‘मैहर डॉल्स’ की यह पहल छोटे स्तर से शुरू होकर महिलाओं के जीवन में बड़े बदलाव का माध्यम बन सकती है।
उन्होंने जानकारी दी कि प्रारंभिक चरण में 25 स्व-सहायता समूहों का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान और राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान के माध्यम से गुड़िया निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं विभिन्न पेशों और पारंपरिक स्वरूपों पर आधारित अलग-अलग प्रकार की गुड़िया तैयार कर सकेंगी।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि इस ब्रांड की ब्रांडिंग और विपणन में जिला प्रशासन पूरा सहयोग करेगा और इस परियोजना में तैयार उत्पादों पर लागत से आठ से दस गुना तक लाभ प्राप्त होने की संभावना है।
उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि मां शारदा मंदिर में चढ़ने वाले फूल और नारियल की जटा का उपयोग कर धूप और अगरबत्ती जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘मैहर डॉल्स’ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए उत्पादों की डिजाइन और फिनिशिंग पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।




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