कोलकाता, 6 मई।
पश्चिम बंगाल की सियासत में चुनावी नतीजों के बाद बड़ा राजनीतिक मोड़ सामने आया है, जहां तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने चुनावी जनादेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। कलीघाट स्थित अपने आवास पर पार्टी के निर्वाचित विधायकों की अहम बैठक के दौरान उन्होंने यह संकेत दिया।
उन्होंने भाजपा पर चुनावी अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में भारी बहुमत हासिल करने के बाद भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी उन्होंने टिप्पणी की।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वे अब कानूनी सक्रियता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और उनके साथ पूर्व राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य भी अदालतों में चुनावी जनादेश को चुनौती देने के लिए अपने कानूनी कार्य की वापसी करेंगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि स्थानीय चुनावों में झटका लगने के बावजूद उनका ध्यान दिल्ली में विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा।
मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने के अपने रुख को उन्होंने दोहराते हुए इसे कथित रूप से छीने गए जनादेश के खिलाफ एक विरोध बताया। यह रुख उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भी समर्थन करते हुए दोहराया और पार्टी नेताओं से अपने पदों पर बने रहने की अपील की। साथ ही उन्होंने चुनाव के बाद हुई हिंसा के खिलाफ कानूनी सहायता लेने की बात कही।
बैठक के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार चाहे तो राष्ट्रपति शासन लागू कर सकती है, लेकिन इसे आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने निर्देश दिया कि 9 मई को कोलकाता ब्रिगेड परेड में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के दिन पार्टी कार्यालयों में रवींद्र संगीत बजाया जाए। साथ ही सभी विजयी उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर जनता से लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए।









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