भोपाल, 06 मई।
नगरीय निकाय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत का कदम उठाया है। अब नगर निगम, नगर पालिका और ग्राम पंचायतों से जुड़े छोटे-मोटे विवादों के समाधान के लिए विशेष न्यायाधिकरण की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सिविल अदालतों पर बढ़ते मामलों के दबाव को कम करना और आम लोगों को शीघ्र तथा सरल न्याय उपलब्ध कराना है। अब अवैध निर्माण, भवन स्वीकृति, सफाई, जल आपूर्ति, अतिक्रमण और क्षेत्रीय सीमाओं से जुड़े विवाद सीधे इसी न्यायाधिकरण में निपटाए जाएंगे, जिससे लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट-कचहरी के चक्कर से मुक्ति मिलेगी।
यह संशोधन मध्यप्रदेश माध्यस्थम अधिकरण अधिनियम 2025 में किया गया है, जिसे 17 अप्रैल से प्रभावी कर दिया गया है। संशोधन के बाद न्यायाधिकरण का दायरा भी काफी विस्तारित किया गया है, जिसमें अब केवल बड़ी परियोजनाएं ही नहीं बल्कि नगर निकायों और ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों से जुड़े विवाद भी शामिल किए गए हैं।
इसके अंतर्गत सड़क, पुल, बांध, सीवरेज, विद्युत लाइन और आपूर्ति से जुड़े ठेकों के उल्लंघन के मामलों का निपटारा भी इसी मंच पर किया जाएगा। इससे विकास कार्यों से जुड़े विवादों के समाधान में तेजी आएगी।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति अब चयन समिति के माध्यम से की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश करेंगे। सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष कर दिया गया है तथा अनियमितता की स्थिति में हटाने के नियम भी अधिक सख्त किए गए हैं।
डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, न्यायाधिकरण को दो वर्ष के भीतर निर्णय देना अनिवार्य किया गया है, विशेष परिस्थितियों में छह माह का अतिरिक्त समय दिया जा सकेगा।
इस नई व्यवस्था से विकास परियोजनाएं विवाद के कारण रुकेंगी नहीं और लंबित भुगतान तथा ठेकेदार संबंधी मामलों का तेजी से समाधान हो सकेगा। आपसी सहमति बनने पर मामलों का तुरंत निपटारा भी संभव होगा।







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