राजनीति
09 Apr, 2026

क्षेत्रीय विकास से ही मजबूत होगा राष्ट्र निर्माण, संजय सेठ का जोर

रांची में आयोजित कार्यक्रम में संजय सेठ ने क्षेत्रीय विकास, सामुदायिक भागीदारी और समन्वय के जरिए समग्र विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

रांची, 09 अप्रैल।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि किसी भी देश के समग्र विकास और राष्ट्र निर्माण की नींव क्षेत्रीय विकास पर आधारित होती है। उन्होंने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों और विभिन्न क्षेत्रों के संयुक्त प्रयासों को आवश्यक बताया।

गुरुवार को रांची में सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट के तत्वावधान में आयोजित एकम डायलॉग्स संवाद से निर्माण कार्यक्रम के दूसरे दिन समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न वक्ताओं द्वारा रखे गए विचारों को जमीन पर उतारने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान पूर्वी और मध्य भारत के लिए समावेशी विकास तथा जलवायु अनुकूलन का एक रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया। संजय सेठ ने कहा कि इस प्रकार की पहलें स्थानीय नेतृत्व, सामुदायिक अनुभव और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जोड़ते हुए विकास की नई दिशा तय कर रही हैं।

कार्यक्रम में संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमापति कुमार ने कहा कि यह पहल केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों को व्यवहार में लागू करने की दिशा में कार्य करती है। उन्होंने बताया कि समावेशी विकास के लिए सामुदायिक नेतृत्व, नवाचार और संस्थागत तालमेल बेहद जरूरी है। दूसरे दिन आयोजित नौ सत्रों में जमीनी स्तर के नवाचार, सामुदायिक भागीदारी, प्रशासनिक सुधार, कम कार्बन विकास और हरित वित्त जैसे विषयों पर समाधान आधारित चर्चा हुई।

अंतिम सत्र में साझा प्रतिबद्धताओं के साथ आगामी कार्ययोजना रखी गई। विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि क्षेत्रीय सहयोग, स्थानीय भागीदारी और समेकित दृष्टिकोण से ही सतत और समावेशी विकास के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए समुदाय, संस्थानों और विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय और साझेदारी जरूरी बताई गई।

कार्यक्रम में देशभर से आए लगभग 70 विशेषज्ञों और वक्ताओं ने हिस्सा लिया। इन सत्रों में जलवायु अनुकूलन, प्रभावी प्रशासन, जलवायु वित्त, जनकेंद्रित ऊर्जा परिवर्तन, तकनीक एवं नवाचार तथा सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

सत्रों में रवि रंजन, पीके हजारी, प्रो. (डॉ.) पीयूष कांत पांडेय, जगदानंद, ऊषा विश्वकर्मा, पद्मश्री राजकुमारी देवी किसान चाची और पद्मश्री फूलबसन यादव सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ और वक्ता उपस्थित रहे।

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