नई दिल्ली, 07 मई।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत 15वें वित्त आयोग की अवधि में सूक्ष्म उद्यमों के विस्तार और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। इस अवधि में देशभर में चार लाख से अधिक नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना में सहायता प्रदान की गई, जिससे लाखों लोगों को आजीविका के अवसर प्राप्त हुए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह योजना खादी और ग्रामोद्योग आयोग के माध्यम से लागू की जा रही है, जिसके तहत बैंक ऋण पर मार्जिन मनी सहायता देकर गैर कृषि क्षेत्रों में नए उद्यमों की स्थापना को बढ़ावा दिया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना रहा है।
इस अवधि में योजना के लिए निर्धारित बजटीय आवंटन का पूर्ण उपयोग किया गया और निर्धारित लक्ष्य से अधिक इकाइयों की स्थापना संभव हो सकी। इससे यह स्पष्ट होता है कि उद्यमिता आधारित योजनाओं की मांग लगातार बनी हुई है और इनके माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी में यह भी बताया गया कि इस कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और स्थायी रोजगार मिला है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। सूक्ष्म उद्यमों के विस्तार ने न केवल स्वरोजगार को बढ़ावा दिया है बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास को भी गति दी है।
योजना का उद्देश्य पहली पीढ़ी के उद्यमियों को आगे बढ़ने का अवसर देना है ताकि वे विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में अपने व्यवसाय स्थापित कर सकें। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में इस योजना ने आजीविका के स्थायी साधन विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।











.jpg)
