संपादकीय
06 May, 2026

पीएम श्री एयर एंबुलेंस योजना: मंशा अच्छी, ज़मीन पर असर सीमित

पीएम श्री एयर एंबुलेंस योजना के सीमित उपयोग, जटिल प्रक्रिया और भुगतान प्रणाली को लेकर इसके जमीनी प्रभाव और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

06 मई।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और त्वरित बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई “पीएम श्री एयर एंबुलेंस योजना” एक महत्वाकांक्षी पहल है। इसका मूल उद्देश्य गंभीर रूप से बीमार या दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को कम समय में बड़े और बेहतर चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाना है, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के लिए यह योजना जीवनदायिनी साबित हो सकती थी, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर इसके क्रियान्वयन में कई खामियां सामने आ रही हैं, जिनके कारण यह योजना आम जनता तक अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच पा रही है।
योजना की मूल अवधारणा के तहत राज्य सरकार ने एक एजेंसी को हेलीकॉप्टर और एक फिक्स्ड-विंग विमान उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। इन एयर एंबुलेंस में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और पायलट की टीम 24×7 तैनात रहती है। विशेष बात यह है कि दो इंजन वाले हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की गई है, जो रात में भी उड़ान भर सकते हैं। आयुष्मान कार्ड धारकों को यह सेवा निशुल्क प्रदान की जाती है, जबकि अन्य लोगों को निर्धारित शुल्क पर इसका लाभ मिल सकता है।
सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिले और मृत्यु दर को कम किया जा सके, लेकिन आंकड़े और ज़मीनी सच्चाई कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं।
पिछले एक वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि योजना का उपयोग बेहद सीमित रहा है। केवल 18 जिलों के मरीज ही इस सुविधा का लाभ उठा पाए हैं। कई महीनों में तो एक भी मरीज की एयरलिफ्टिंग नहीं हो सकी। यह स्थिति तब है, जब सरकार हर महीने लगभग ढाई करोड़ रुपये का फिक्स भुगतान एजेंसी को कर रही है।
इससे यह सवाल उठता है कि जब सेवा का उपयोग ही नहीं हो रहा, तो इतना बड़ा खर्च किस हद तक उचित है। क्या यह संसाधनों का प्रभावी उपयोग है या फिर कहीं न कहीं योजना के क्रियान्वयन में गंभीर कमी है।
योजना का लाभ सीमित रहने का सबसे बड़ा कारण इसकी जटिल प्रक्रिया है। आम नागरिक को यह तक नहीं पता कि आपात स्थिति में किससे संपर्क किया जाए। क्या कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी, क्या सीएमएचओ से संपर्क करना होगा या जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करनी होगी—ऐसी अस्पष्टता के कारण जरूरतमंद व्यक्ति समय पर सहायता नहीं ले पाता। वहीं, जिन लोगों की पहुंच अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों तक होती है, उन्हें अपेक्षाकृत जल्दी सेवा मिल जाती है। इससे यह योजना समान अवसर देने के अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आती है।
प्रदेश के आधे से अधिक जिलों तक इस योजना का प्रभाव नहीं पहुंच पाया है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीज, जिनके लिए यह योजना सबसे अधिक उपयोगी हो सकती थी, वे इससे वंचित रह जाते हैं। यह स्थिति योजना के समावेशी स्वरूप पर सवाल खड़े करती है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सेवा का लाभ मरीजों को मिले या न मिले, एजेंसी को हर महीने फिक्स भुगतान मिल रहा है। इससे यह धारणा बन रही है कि योजना का आर्थिक लाभ अधिकतर एजेंसी को मिल रहा है, जबकि आम जनता को अपेक्षित फायदा नहीं मिल पा रहा। यह स्थिति पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करती है।
इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुधार आवश्यक हैं। प्रक्रिया का सरलीकरण जरूरी है, क्योंकि आपात स्थिति में त्वरित निर्णय आवश्यक होता है। एयर एंबुलेंस सेवा के लिए एक स्पष्ट और सरल प्रोटोकॉल होना चाहिए। एक हेल्पलाइन नंबर या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है। लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि यह सेवा कैसे और कब ली जा सकती है, इसके लिए जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए, जो इस सेवा के संचालन और निगरानी के लिए जिम्मेदार हो। फिक्स भुगतान की बजाय “पे-पर-यूज” मॉडल अपनाया जा सकता है, ताकि एजेंसी को सेवा के वास्तविक उपयोग के आधार पर भुगतान मिले। एंबुलेंस सेवा को 108 या अन्य आपातकालीन सेवाओं से जोड़ा जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत एयर एंबुलेंस की सुविधा सक्रिय हो सके।
पीएम श्री एयर एंबुलेंस योजना एक दूरदर्शी और आवश्यक पहल है, लेकिन इसकी सफलता इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि योजना की मंशा और वास्तविकता के बीच एक बड़ा अंतर है। यदि सरकार प्रक्रिया को सरल बनाए, पारदर्शिता सुनिश्चित करे और आम जनता तक इसकी पहुंच बढ़ाए, तो यह योजना वास्तव में हजारों जिंदगियां बचाने में सक्षम हो सकती है। अन्यथा यह एक ऐसी योजना बनकर रह जाएगी, जिसका लाभ कागजों में तो दिखेगा, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सीमित ही रहेगा। जनता को लाभ देने के लिए दूरगामी प्रभाव और त्वरित चिकित्सकीय सुविधा के उद्देश्य से बनाई गई यह योजना अब तक अपने उद्देश्य को पूर्ण रूप से हासिल नहीं कर पाई है।
 
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