भोपाल, 08 अप्रैल 2026।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दिवाली तक इसे लागू करने के संकेत दिए जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। यह मुद्दा अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है और विधानसभा में आगामी सत्र में इसे लेकर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने मुख्यमंत्री के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यूसीसी देश में बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए आवश्यक है। उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि “एक कौम 5 बीवी और 25 बच्चे पैदा कर आबादी संकट पैदा कर रही है।” शर्मा ने तर्क दिया कि जब सभी को समान शिक्षा, रोजगार और योजनाओं का लाभ चाहिए, तो कानून भी सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि “बच्चे दो ही अच्छे” का नारा देने वाली पार्टी को यूसीसी का समर्थन करना चाहिए।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार किया और कहा कि सरकार असली मुद्दों जैसे गैस और खाद की कमी से ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी का मुद्दा उठा रही है। मसूद ने सवाल उठाया कि आदिवासियों को इस कानून से बाहर रखा गया तो “यूनिफॉर्म” कैसे रहेगा और क्या सरकार केवल एक समुदाय को निशाना बना रही है।
रामेश्वर शर्मा के ‘ज्यादा बच्चे’ वाले बयान पर मसूद ने दोहरा मापदंड होने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोग अधिक बच्चे पैदा करने की बात करते हैं, लेकिन केवल एक वर्ग को निशाना बनाना सही नहीं है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूसीसी लागू करने से पहले अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड, गुजरात और असम के कानूनों का अध्ययन कर राज्य में प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसके लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की तैयारी भी चल रही है। वहीं कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और कहा कि संवेदनशील मुद्दे पर सभी वर्गों की सहमति जरूरी है, विशेषकर आदिवासी समाज की परंपराओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।













