श्रीनगर, 08 मई।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को भाजपा पर राज्य के दर्जे को लेकर “ब्लैकमेल की राजनीति” करने का आरोप लगाया और कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी का कारण राजनीतिक डर नहीं बल्कि केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता की यह टिप्पणी कि सत्तारूढ़ दल के भीतर अस्थिरता है, पूरी तरह गलत है और नेशनल कॉन्फ्रेंस में किसी प्रकार की टूट या असहमति की स्थिति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी में पूरी एकजुटता बनी हुई है और सभी विधायक एक साथ हैं।
मुख्यमंत्री ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विपक्ष के नेता की बेचैनी उनके बयानों से साफ झलकती है और वे राज्य में मंत्री पद हासिल करने की कोशिश में व्याकुल दिखाई दे रहे हैं।
परिसीमन को लेकर चल रही चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में यह प्रक्रिया भाजपा और उसके सहयोगियों को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि परिसीमन के माध्यम से केवल कुछ विशेष वर्गों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया।
अब्दुल्ला ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार में देरी किसी राजनीतिक अस्थिरता या भय के कारण नहीं है, बल्कि इसलिए है क्योंकि जम्मू-कश्मीर को अभी तक पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण चुनी हुई सरकार के कामकाज में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं और इसी वजह से प्रशासनिक निर्णयों में देरी हो रही है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य के दर्जे को लेकर जनता पर दबाव बनाया जा रहा है और पिछले चुनाव में भाजपा को वोट देने वालों को यह समझना चाहिए कि पार्टी इस मुद्दे पर “ब्लैकमेल की राजनीति” कर रही है।





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