बिहार
10 Apr, 2026

रोहतास में 26 एकड़ जमीन घोटाले का आरोप, राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर से मचा हड़कंप

रोहतास में 26 एकड़ जमीन से जुड़े कथित घोटाले ने प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर और दस्तावेज गायब होने के आरोप गंभीर हैं।

रोहतास, 10 अप्रैल।

बिहार में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय सिन्हा के प्रयासों के बावजूद उनके ही विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ताजा मामला रोहतास जिले के कोचस अंचल से सामने आया है, जहां जमीन से जुड़े बड़े घोटाले का आरोप लगाया गया है।

कोचस प्रखंड के ग्राम सरेयां में लगभग 26 एकड़ पुश्तैनी भूमि को कथित रूप से साजिश के तहत राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर एक महिला और उसके बेटों के नाम दर्ज करने का आरोप है। इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। एक ही भूमि पर बार-बार फर्जीवाड़ा, अदालत की टिप्पणी के बावजूद दोबारा बदलाव और अब रिकॉर्ड गायब होने से व्यवस्था पर संदेह गहराता जा रहा है।

ग्राम सरेयां निवासी रजनीकांत तिवारी ने आरोप लगाया है कि स्व. मारकण्डेय तिवारी की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति पर पत्नी और तीनों बेटियों का समान अधिकार था। नियमानुसार नामांतरण के बाद वर्षों तक सभी के नाम से मालगुजारी रसीद भी जारी होती रही।

शिकायत के अनुसार वर्ष 2011 में पदमावती मिश्रा ने कथित फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से सासाराम लोक अदालत से पूरी संपत्ति अपने नाम कराने का प्रयास किया था। लेकिन 16 मार्च 2012 को लोक अदालत ने आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट कहा कि अदालत को गुमराह कर निर्णय प्राप्त किया गया था।

इसके बावजूद आरोप है कि बाद में उसी जमीन का रिकॉर्ड फिर से बदल दिया गया। इसमें पदमावती मिश्रा और उनके बेटों निखिल व राहुल के नाम पर 26 एकड़ में से बड़ा हिस्सा दर्ज कर दिया गया, जबकि दो बेटियों के नाम रिकॉर्ड से पूरी तरह हटा दिए गए।

म्यूटेशन फाइल गायब, आरटीआई का जवाब नहीं

मामले में म्यूटेशन केस संख्या 455/16-17 के दस्तावेजों को लेकर भी संदेह गहराया है। जब इसकी प्रति मांगी गई तो अंचल कार्यालय ने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की बात कही। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी भी तय समय सीमा के बाद उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे मामले में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

खरीदार भी प्रभावित, म्यूटेशन रुका

इस विवाद का असर तीसरे पक्ष पर भी पड़ा है। बड़ी बहन आशा पाण्डेय द्वारा बेची गई भूमि के खरीदारों का म्यूटेशन अटक गया है, जिससे वे कानूनी और आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।

बड़ा सवाल यह है कि जब संपत्ति पर बेटों का सीधा अधिकार नहीं था, तो राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम कैसे दर्ज किया गया।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, रिकॉर्ड में सुधार, वास्तविक उत्तराधिकारियों के नाम बहाल करने और कथित गड़बड़ी में शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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