नई दिल्ली, 06 मई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निःस्वार्थ सेवा, करुणा और मानवता के मूल्यों पर बल देते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया है। उन्होंने कहा कि बिना किसी स्वार्थ के किया गया कार्य ही सच्ची मानवता की पहचान होता है, जो व्यक्ति को आंतरिक संतोष देने के साथ-साथ समाज के कल्याण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए लिखा कि निःस्वार्थ भाव से किए गए कर्म से मन को आनंद प्राप्त होता है और यह समाज को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। इसी क्रम में उन्होंने एक संस्कृत सुभाषित भी प्रस्तुत किया।
सुभाषित में कहा गया है:
“अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।
अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”
इसका भावार्थ यह है कि सभी प्राणियों के प्रति मन, वचन और कर्म से किसी प्रकार का द्वेष न रखना, सभी के प्रति दया और करुणा का भाव रखना तथा दानशीलता का पालन करना श्रेष्ठ आचरण माना जाता है।










