कोलकाता, 08 जून।
शहरी निकाय भर्ती घोटाले में फंसे पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को कलकत्ता उच्च न्यायालय से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिका की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में ऐसी विशेष तत्परता क्यों दिखाई जा रही है।
पूर्व मंत्री के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उनकी गिरफ्तारी की वैधता संदिग्ध है और इसके ठोस आधार नहीं बताए गए हैं। उन्होंने ईडी की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है, तो अब इस चरण पर त्वरित सुनवाई का औचित्य नहीं बनता। कोर्ट ने सुझाव दिया कि इस स्थिति में उन्हें नियमित जमानत याचिका दाखिल करनी चाहिए।
न्यायालय ने इस मामले को अब जुलाई महीने में नियमित बेंच के समक्ष सुनवाई हेतु सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। इससे पूर्व भी न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पाल की पीठ ने मामले को नियमित सुनवाई के लिए भेजा था। ईडी के अनुसार, सुजीत बोस पर दक्षिण दमदम नगरपालिका में करीब 150 लोगों को अवैध रूप से भर्ती करने और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच निरंतर जारी है।














