भोपाल, 11 जून।
मंगोलिया के दस दिवसीय आध्यात्मिक प्रवास के बाद भगवान बुद्ध के परम शिष्यों अरिहंत सारिपुत्र और महामौद्गलायन के पवित्र अस्थि अवशेष गुरुवार को पुनः भोपाल पहुंचे, जहां राजा भोज विमानतल पर श्रद्धा और सम्मान के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया।
राजा भोज विमानतल पर सांची से भेजे गए इन पवित्र अवशेषों के आगमन पर श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा औपचारिक समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में महाबोधि सोसायटी, सांची के बान गल उप तिस्स नायक थेरो एवं बान गल विमल तिस्स थेरो सहित संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान पवित्र अवशेषों को विधिवत रूप से महाबोधि सोसायटी और जिला प्रशासन रायसेन को सौंपा गया।
मंत्री परमार ने कहा कि भगवान बुद्ध का करुणा, शांति और वैश्विक बंधुत्व का संदेश आज भी पूरी दुनिया को दिशा दे रहा है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ा रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि मंगोलिया के गंदन मठ में आयोजित प्रदर्शनी के दौरान लगभग एक लाख श्रद्धालुओं ने इन पवित्र अवशेषों के दर्शन किए, जो इस यात्रा की व्यापक आध्यात्मिक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
महाबोधि सोसायटी के प्रतिनिधियों ने भारत सरकार और मध्य प्रदेश शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से वैश्विक बौद्ध समुदाय को दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर प्राप्त हुआ है।
गौरतलब है कि ये अस्थि अवशेष 28 मई 2026 को भोपाल से मंगोलिया भेजे गए थे और 31 मई से उलानबातर स्थित गंदन तेगचेनलिंग मठ में दर्शन के लिए रखे गए थे, जहां लाखों श्रद्धालुओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। यह यात्रा भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने वाली सिद्ध हुई।










