नई दिल्ली, 11 जून।
एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारत वैश्विक स्तर पर प्रमुख वीजा कार्यक्रमों में शीर्ष स्थानों पर बना हुआ है और अब देश को दुनिया के सबसे बड़े कुशल प्रतिभा निर्यातक देशों में शामिल किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की पेशेवर कार्यबल आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार मजबूत स्थिति में पहुंच रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम में भारत सबसे बड़ा स्रोत देश है, जबकि ब्रिटेन के स्किल्ड वर्कर वीजा और यूरोपीय संघ के ब्लू कार्ड कार्यक्रम में भारतीय प्रतिभाएं दूसरे स्थान पर हैं। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात के गोल्डन वीजा और सामान्य रोजगार वीजा दोनों श्रेणियों में भी भारतीय सबसे आगे हैं।
वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनी डील की रिपोर्ट में बताया गया है कि 150 से अधिक देशों और 40,000 से ज्यादा कंपनियों के भर्ती आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष सामने आया है कि वैश्विक कंपनियां अब केवल कम लागत के बजाय उच्च कौशल वाली प्रतिभा के लिए अधिक वेतन देने को तैयार हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वीजा धारक कर्मचारियों को कई देशों में स्थानीय कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन मिल रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय भर्ती का मुख्य कारण प्रतिभा की कमी है, न कि कम लागत पर श्रम उपलब्ध कराना।
अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों का औसत वेतन लगभग 1.40 लाख डॉलर बताया गया है, जबकि समान पदों पर अमेरिकी नागरिकों का औसत वेतन 1.30 लाख डॉलर है। ब्रिटेन में स्किल्ड वर्कर वीजा धारकों की आय लगभग 96,000 पाउंड और स्थानीय कर्मचारियों की 87,000 पाउंड बताई गई है। यूएई में गोल्डन वीजा धारकों की औसत आय भी अधिक पाई गई है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भारतीय पेशेवरों की भर्ती में सबसे तेज वृद्धि ऑस्ट्रेलिया में दर्ज की गई है, जहां साल-दर-साल 724 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद ब्रिटेन और अमेरिका का स्थान है।
इसके अनुसार भारतीय पेशेवरों के लिए यूएई सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है, जिसके बाद सिंगापुर, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा का स्थान आता है। इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभाओं की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई है कि आने वाले समय में विदेशों में काम कर चुके भारतीय पेशेवर घरेलू अवसरों के बढ़ने के कारण वापस देश लौट सकते हैं, जिससे भारत की प्रतिभा और आर्थिक क्षमता को और मजबूती मिलेगी।










