अयोध्या, 11 जून।
श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे को लेकर लगाए गए कथित अनियमितताओं के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। स्वयं को मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह ने दावा किया है कि चढ़ावे से संबंधित वित्तीय प्रक्रियाओं में गड़बड़ियां हुई हैं और इस संबंध में उन्होंने पहले भी मंदिर प्रबंधन को शिकायत दी थी।
महिपाल सिंह का आरोप है कि उन्होंने कथित अनियमितताओं की जानकारी ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को दी थी। उनका कहना है कि शिकायत के बाद उन्हें उनके दायित्व से हटा दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में लगे कुछ सीसीटीवी फुटेज हटाए गए और चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से नहीं रखा गया।
इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न संगठनों और संत समाज की ओर से इस पूरे प्रकरण को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषयों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। कई संतों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने भी मामले की तथ्यात्मक जांच की जरूरत बताई है।
दूसरी ओर, मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि मंदिर में प्राप्त होने वाले चढ़ावे और उससे संबंधित व्यवस्थाओं का संचालन निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किया जाता है। ट्रस्ट से जुड़े पक्षों ने कहा है कि यदि किसी प्रकार की जांच होती है तो उससे सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच राम मंदिर चढ़ावा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और जांच की मांग को लेकर क्या निर्णय सामने आता है।











