ओमान तट, 11 जून।
भारत ने ओमान तट के पास तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर हुई कार्रवाई को लेकर अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह घटना उस समय सामने आई जब पलाऊ ध्वज वाले इस जहाज पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड की कार्रवाई में कथित तौर पर इंजन कक्ष को निशाना बनाकर उसे निष्क्रिय किया गया।
अमेरिकी पक्ष का दावा है कि यह जहाज ईरान से तेल ढोते हुए लागू नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था और चेतावनी के बावजूद अनुपालन नहीं किया गया, जिसके बाद सटीक हथियारों से हमला किया गया।
घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को तलब कर भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर अपनी गंभीर चिंता से अवगत कराया। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने भी अमेरिकी पक्ष के समक्ष स्थिति स्पष्ट की।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशों में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे हमलों से समुद्री कर्मियों का जीवन खतरे में पड़ता है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भारत ने यह भी कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे उचित मार्ग है तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध नौवहन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सरकारी बयान के अनुसार, जहाज पर मौजूद 24 भारतीय चालक दल में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि तीन अभी भी लापता हैं। ओमान स्थित भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर खोज एवं बचाव अभियान पर लगातार नजर रखे हुए है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह कार्रवाई लगातार दूसरे दिन की गई थी और इससे पहले भी कई जहाजों पर कार्रवाई, मार्ग परिवर्तन और मानवीय सहायता पोतों को अनुमति देने की बात कही गई है।
भारत ने दोहराया है कि क्षेत्र में बढ़ते समुद्री हमले गंभीर चिंता का विषय हैं और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए।










