मध्य प्रदेश
11 Jun, 2026

डीएससीआई में ग्लोबल फैटी लिवर डे, विशेषज्ञों ने लीवर कैंसर से बचाव पर दी चेतावनी

डीएससीआई में ग्लोबल फैटी लिवर डे पर विशेषज्ञों ने फैटी लिवर और लीवर कैंसर के बढ़ते खतरे पर जागरूकता फैलाते हुए समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और स्क्रीनिंग को जरूरी बताया।

नई दिल्ली, 11 जून।

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) में गुरुवार को ग्लोबल फैटी लिवर डे 2026 के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने फैटी लिवर रोग और उससे जुड़े लीवर कैंसर के बढ़ते जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की। यह आयोजन स्पेयर सोसायटी के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, नर्सिंग स्टाफ, डायटीशियन और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि फैटी लिवर रोग की समय पर पहचान, स्वस्थ जीवनशैली और नियमित जांच के जरिए गंभीर जटिलताओं, विशेषकर लीवर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. नरेश अग्रवाल ने “फैटी लिवर से एचसीसी तक” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि मेटाबोलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआती पहचान और उपचार से सिरोसिस और लीवर कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों को रोका जा सकता है।

इसके बाद आयोजित पैनल चर्चा में डीएससीआई के डॉ. पंकज त्यागी, डॉ. वसुधा गोयल और डायटीशियन अंजुमन ने फैटी लिवर के प्रबंधन, चुनौतियों और उपचार के आधुनिक तरीकों पर विचार साझा किए।

डॉ. पंकज त्यागी ने कहा कि फैटी लिवर आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते लीवर रोगों में शामिल है और समय पर जांच तथा जीवनशैली में सुधार के जरिए इसके गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।

डीएससीआई की निदेशक डॉ. सविता अरोड़ा ने कहा कि यह आयोजन निवारक ऑन्कोलॉजी और जनस्वास्थ्य के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोधों से फैटी लिवर और लीवर कैंसर के बीच मजबूत संबंध सामने आ रहा है, इसलिए जागरूकता और नियमित स्क्रीनिंग अत्यंत आवश्यक है।

संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. रविंदर सिंह ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को अपने लीवर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों ने मोटापा, मधुमेह, मेटाबोलिक सिंड्रोम, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता को फैटी लिवर रोग के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

कार्यक्रम का समापन “लव योर लिवर” संदेश के साथ किया गया, जिसमें लोगों से अपने लीवर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और नियमित जांच कराने की अपील की गई।

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