नई दिल्ली, 11 जून।
देश के राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था में बड़ा तकनीकी बदलाव लाने की दिशा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नेटवर्क सर्वे व्हीकल (NSV) तकनीक को लागू करने की पहल की है। इस उन्नत 3डी लेजर आधारित प्रणाली से अब सड़क की स्थिति का डिजिटल आकलन किया जाएगा, जिससे रखरखाव और मरम्मत की प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी बन सकेगी।
इस तकनीक से लैस वाहन चलते-चलते सड़क की सतह का विस्तृत सर्वे करेंगे और गड्ढों, दरारों, पैचवर्क की कमियों तथा असमानताओं की पहचान करेंगे। इसके जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों का उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल मानचित्र तैयार किया जाएगा, जिससे सड़क की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।
मंत्रालय के अनुसार, ये एनएसवी वाहन केवल सर्वेक्षण का साधन नहीं होंगे, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्गों के “डिजिटल संरक्षक” के रूप में कार्य करेंगे। ये सड़क के हर हिस्से की स्कैनिंग कर संभावित खामियों की पहले ही पहचान कर लेंगे, जिससे समय रहते मरम्मत कार्य किया जा सकेगा।
इस पहल को सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के रखरखाव में तकनीक आधारित बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। पहले जहां सड़क निरीक्षण में लंबा समय लगता था, वहीं अब यह प्रक्रिया कुछ ही दिनों में पूरी हो सकेगी। नई प्रणाली से प्रतिदिन लगभग 300 किलोमीटर तक राजमार्गों का सर्वेक्षण संभव होगा, जबकि पहले यह क्षमता 20 से 80 किलोमीटर तक सीमित थी।
एकत्रित डेटा को एन्क्रिप्ट कर 48 घंटे के भीतर केंद्रीय डेटा केंद्र भेजा जाएगा, जहां विशेषज्ञ टीमें इसका विश्लेषण करेंगी। इसके बाद 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि पहले यह प्रक्रिया चार से छह महीने तक चलती थी।
सभी डेटा को एआई आधारित डेटा लेक पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा, जिससे वास्तविक समय में निगरानी और विश्लेषण संभव होगा। इससे सड़क रखरखाव और मरम्मत की योजना अधिक प्रभावी तरीके से बनाई जा सकेगी।
इस प्रणाली के तहत हर छह महीने में दो लेन से आठ लेन तक के राष्ट्रीय राजमार्गों का नियमित सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें भारी यातायात वाले मार्ग और मौसम से प्रभावित क्षेत्र भी शामिल रहेंगे। साथ ही मोबाइल ऐप के माध्यम से निरीक्षकों को रिपोर्ट देखने, जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड करने और सुधार कार्यों की निगरानी की सुविधा मिलेगी।
मंत्रालय का मानना है कि यह तकनीक आधारित व्यवस्था सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने, रखरखाव कार्यों में तेजी लाने और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं सुगम यात्रा उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी।










