नई दिल्ली, 11 जून।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग की शासी परिषद की 11वीं बैठक में विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निपटारे पर विशेष जोर दिया। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित इस बैठक में विभिन्न राज्यों से जुड़े विकास और मानव संसाधन संबंधी मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।
बैठक के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने बताया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों से प्राप्त सुझावों और अनुभवों ने चर्चा को अधिक उपयोगी और परिणामोन्मुख बनाया।
लाहिड़ी के अनुसार, इस वर्ष बैठक का विषय ‘विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ रखा गया था। बैठक में मानव विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसमें बचपन, युवावस्था, कामकाजी आयु और वृद्धावस्था सहित जीवन के सभी चरणों को केंद्र में रखकर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि समावेशी मानव विकास की अवधारणा केवल शिक्षा और स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलू भी शामिल हैं। बैठक के दौरान इन विषयों पर राज्यों के अनुभव और सुझाव साझा किए गए।
अशोक कुमार लाहिड़ी ने बताया कि नीति आयोग की इस बैठक में 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ पांच केंद्र शासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल और प्रशासक भी शामिल हुए। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि पहली बार नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ उपस्थित रहे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न परिस्थितियों के बावजूद किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान विशेष सहायता की मांग नहीं की। उनके अनुसार बैठक का मुख्य फोकस विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण और भविष्य की रणनीतियों पर केंद्रित रहा।











