भुवनेश्वर, 11 जून।
ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से दो महत्वपूर्ण जांच आयोग की रिपोर्टों के कथित रूप से गायब होने के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। इस संबंध में गृह विभाग की शिकायत पर राजधानी पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
गायब बताए जा रहे दस्तावेजों में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्या और उसके बाद हुई कंधमाल हिंसा से संबंधित न्यायमूर्ति ए.एस. नायडू आयोग की रिपोर्ट तथा भुवनेश्वर स्थित सम अस्पताल अग्निकांड से जुड़ी आरडीसी जांच रिपोर्ट शामिल हैं। इन दोनों रिपोर्टों को अत्यंत संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व का माना जा रहा है।
शिकायत गृह विभाग के संयुक्त सचिव शरत चंद्र मरांडी द्वारा दर्ज कराई गई है, जिसमें रिपोर्टों के गायब होने की विस्तृत आपराधिक जांच की मांग की गई है। पुलिस ने इस मामले में कई गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है, जो संभावित आपराधिक कदाचार की ओर संकेत करता है।
जानकारी के अनुसार, दोनों रिपोर्टें पहले संबंधित आयोगों से प्राप्त होकर मुख्य सचिव कार्यालय के माध्यम से सीएमओ को भेजी गई थीं। नायडू आयोग की रिपोर्ट 2016 में और आरडीसी रिपोर्ट 2018 में मुख्यमंत्री कार्यालय को अग्रेषित की गई थी।
गृह विभाग के अनुसार हाल ही में पता चला कि ये दोनों रिपोर्टें अब सीएमओ में उपलब्ध नहीं हैं और खोजबीन के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल सका है। इसी अवधि में भेजी गई कई अन्य फाइलें 2024 में वापस कर दी गई थीं, लेकिन ये दोनों रिपोर्टें वापस नहीं आईं।
शिकायत में यह भी आशंका जताई गई है कि इन दस्तावेजों को जानबूझकर हटाया, छिपाया या नष्ट किया गया हो सकता है, जो गंभीर आपराधिक गतिविधियों की श्रेणी में आता है। गृह विभाग ने इसे सरकारी अभिलेखों की गंभीर अनियमितता मानते हुए तत्काल जांच की मांग की है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये रिपोर्टें कैसे गायब हुईं, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और इनके साथ क्या हुआ।











