विज्ञान व प्रौद्योगिकी
16 Jun, 2026

कैंसर इलाज में नई उम्मीद, आईआईटी जोधपुर ने बढ़ाया सही दवा चयन का रास्ता

आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं ने ऐसे प्रेडिक्टिव बायोमार्कर्स विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिनसे कैंसर मरीजों में उपचार प्रतिरोध का पहले से अनुमान लगाकर सही दवा चुनने में चिकित्सकों को मदद मिल सकेगी।

जोधपुर, 16 जून।

आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं ने कैंसर उपचार को अधिक प्रभावी और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम सफलता हासिल की है। संस्थान की टीम नई पीढ़ी के प्रेडिक्टिव बायोमार्कर्स विकसित करने पर काम कर रही है, जिनकी मदद से यह पहले ही अनुमान लगाया जा सकेगा कि कौन-से कैंसर मरीज कीमोथेरेपी या अन्य कैंसर-रोधी उपचारों के प्रति प्रतिरोध विकसित कर सकते हैं। इस पहल से चिकित्सकों को उपचार शुरू करने से पहले ही मरीज के लिए उपयुक्त दवा चुनने में सहायता मिलेगी।

देश में हर साल करीब 5.9 लाख से अधिक लोगों की मौत कैंसर के कारण होती है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के बावजूद बड़ी संख्या में मरीज उपचार के दौरान प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जिससे उपचार का असर कम हो जाता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिक कैंसर बायोलॉजी, प्रिसीजन मेडिसिन और ट्रांसलेशनल थेरेप्यूटिक्स के क्षेत्र में उन्नत शोध कर रहे हैं।

इस शोध का नेतृत्व आईआईटी जोधपुर के बायोसाइंस एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट लेबोरेटरी के प्रमुख डॉ. दिनेश कुमार अहिरवार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि कुछ मरीज उपचार से बेहतर लाभ क्यों प्राप्त करते हैं और कुछ मामलों में उपचार अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं दे पाता। उपचार प्रतिरोध से जुड़े आणविक और कोशिकीय तंत्रों की पहचान कर चिकित्सकों को अधिक सटीक उपचार निर्णय लेने में मदद मिल सकेगी।

शोध टीम सिंगल-सेल सीक्वेंसिंग, मल्टीकलर हाई-पैरामीटर फ्लो साइटोमेट्री, आधुनिक आणविक जीवविज्ञान तकनीकों और कम्प्यूटेशनल विश्लेषण का उपयोग कर रही है। इन उन्नत तकनीकों के जरिए ट्यूमर के भीतर मौजूद विभिन्न कैंसर कोशिकाओं का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है, जिससे दवा प्रतिरोध के कारणों को समझने में मदद मिल रही है।

वैज्ञानिकों ने उपचार-प्रतिरोधी ट्यूमर में सक्रिय कुछ विशेष आणविक मार्गों की भी पहचान की है। इसके आधार पर पहले से स्वीकृत दवाओं को कीमोथेरेपी के साथ जोड़कर उपयोग करने की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। ड्रग रिपर्पजिंग की यह रणनीति नई दवाओं के विकास में लगने वाले समय और लागत को कम करने के साथ उपचार की सफलता बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

शोधकर्ता उन्नत प्रीक्लिनिकल मॉडल, ह्यूमनाइज्ड माउस मॉडल और मरीज-विशिष्ट लंग-ऑन-चिप सिस्टम का भी उपयोग कर रहे हैं। ये तकनीकें मानव शरीर में उपचार के प्रभावों का अधिक सटीक मूल्यांकन करने में मददगार हैं। इसके अतिरिक्त यह अध्ययन सिलिकोसिस जैसी व्यावसायिक बीमारियों के शोध में भी उपयोगी साबित हो सकता है। शोध का अंतिम लक्ष्य ऐसे बायोमार्कर्स विकसित करना है, जो उपचार शुरू होने से पहले ही यह संकेत दे सकें कि कोई मरीज कीमोथेरेपी के प्रति प्रतिरोध विकसित करेगा या नहीं। इससे अनावश्यक उपचारों से बचाव होगा, उपचार की सफलता बढ़ेगी और मरीजों पर पड़ने वाला शारीरिक, मानसिक तथा आर्थिक बोझ कम किया जा सकेगा।

|
आज का राशिफल

अपनी गतिविधियों पर पुनर्विचार करें। वैचारिक द्वन्द्व और असंतोष बना रहेगा। किसी सूचना से पूर्ण निर्णय सम्भव। सुख आरोग्य प्रभावित होगा। शत्रुभय, चिंता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। किसी नजदीकी शुभचिंतक सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। शुभांक-5-6-7

आज का मौसम

भोपाल

25° / 30°

Cloudy

ट्रेंडिंग न्यूज़